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सिंधु नहीं, सरस्वती नदी घाटी में पनपी हड़प्पा सभ्यता
Varanasi
Updated Sun, 31 Mar 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। हड़प्पा सभ्यता का मूल उद्भव सिंधु नहीं बल्कि सरस्वती नदी घाटी में हुआ है। इसका प्रमाण भिर्राना, राखीगढ़ी, फरमाना, गिरवाड आदि पुरास्थलों से प्राप्त अवशेषों से मिलता है। शनिवार को बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली के पूर्व संयुक्त महानिदेशक डा. केएन दीक्षित ने ये बातें कही।
उन्होंने प्राप्त मृदभांडाें का क्षेत्रीय संस्कृति के आधार पर विभाजित करने का प्रयास किया। बलूचिस्तान, सिंधु क्षेत्र और चोलिस्तान (हकरा नदी क्षेत्र) से प्राप्त मृदभांड को हकरा प्रकार के मृदभांड की संज्ञा दी, जिसके ऊपर मिट्टी का लेप मिलता है। उन्होंने रहमान ढेरी को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया, जहां से लघु पाषाणिक उपकरण, तेज चाक पर निर्मित मृदभांड के अतिरिक्त हस्तनिर्मित मृदभांड भी प्राप्त हुए हैं। उन्हाेंने घग्घर, सरस्वती, चौतांग नदियाें का उद्गम क्षेत्र शिवालिक माना है। उन्हाेंने इसके अतिरिक्त राजस्थान से प्राप्त पुष्पपराग विश्लेषण के आधार पर तत्कालीन पर्यावरणीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला। संगोष्ठी में विभागाध्यक्ष प्रो. मो. नसीम, प्रो. विभा त्रिपाठी, प्रो. सीताराम दूबे, डा. आरएन सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, डा. आेंकारनाथ सिंह, डा. अशोक कुमार सिंह, डा. सुजाता गौतम समेत काफी संख्या में छात्र उपस्थित थे।
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उन्होंने प्राप्त मृदभांडाें का क्षेत्रीय संस्कृति के आधार पर विभाजित करने का प्रयास किया। बलूचिस्तान, सिंधु क्षेत्र और चोलिस्तान (हकरा नदी क्षेत्र) से प्राप्त मृदभांड को हकरा प्रकार के मृदभांड की संज्ञा दी, जिसके ऊपर मिट्टी का लेप मिलता है। उन्होंने रहमान ढेरी को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया, जहां से लघु पाषाणिक उपकरण, तेज चाक पर निर्मित मृदभांड के अतिरिक्त हस्तनिर्मित मृदभांड भी प्राप्त हुए हैं। उन्हाेंने घग्घर, सरस्वती, चौतांग नदियाें का उद्गम क्षेत्र शिवालिक माना है। उन्हाेंने इसके अतिरिक्त राजस्थान से प्राप्त पुष्पपराग विश्लेषण के आधार पर तत्कालीन पर्यावरणीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला। संगोष्ठी में विभागाध्यक्ष प्रो. मो. नसीम, प्रो. विभा त्रिपाठी, प्रो. सीताराम दूबे, डा. आरएन सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, डा. आेंकारनाथ सिंह, डा. अशोक कुमार सिंह, डा. सुजाता गौतम समेत काफी संख्या में छात्र उपस्थित थे।
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