{"_id":"140-91217","slug":"Varanasi-91217-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर कदम बढ़ा बाबा की ओर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर कदम बढ़ा बाबा की ओर
Varanasi
Updated Sun, 10 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। भोले की नगरी काशी में शनिवार की शाम चहुंदिशि आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। न भीड़ में गिरने की फिक्र, न धक्कामुक्की की चिंता। चाहे बुजुर्ग हों या किशोर, हर किसी के कदम बाबा के दरबार की ओर ही बढ़ते नजर आए। लाइन में लगीं महिलाएं बाबा के गान गाते हुए आगे बढ़ती रहीं तो सेवादार भी चाय-पानी लेकर थकान मिटाने और श्रद्धालुओं की सेवा कर पुण्य बटोरने रात में ही निकल पड़े। आधी रात के बाद दशाश्वमेध इलाका भीड़ के चलते पैक हो गया। महाशिवरात्रि पर करीब पांच लाख से अधिक शिवभक्तों के काशी पहुंचने का अनुमान है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सुबह से लगी लाइन रात तक लगी ही रह गई। एक तरफ लोग दर्शन करते निकलते गए तो दूसरी तरफ रेला बढ़ता गया। रात साढ़े 11 बजे तक लंबी कतार में लगे लोग बांसफाटक से लेकर चौक तक धक्कामुक्की करते नजर आए। सड़कों से गलियों तक हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। देश के कोने-कोने से वाहनों से आधी रात तक पहुंचने वाले वाहनों को खड़ा करने तक की जगह मिलनी मुश्किल हो गई। गंगा तट से लेकर गलियों, सड़कों तक चलना मुश्किल हो गया। आस्था का यह प्रवाह सड़कों पर उफान मारता रहा।
लोक मंगल का गान बाबा के सजे-संवरे मंदिरों, विग्रहों से शुरू हो गया। विश्वनाथ मंदिर को बेला, गुलाब, कुंद, गेंदा के फूलों से सजाने का काम देर शाम तक पूरा कर लिया गया। इसी के साथ स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन की छटा फूलों की खुशबू में और भी निखर कर हर तन-मन को प्रफुल्लित कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए सुबह से लगी लाइन रात तक लगी ही रह गई। एक तरफ लोग दर्शन करते निकलते गए तो दूसरी तरफ रेला बढ़ता गया। रात साढ़े 11 बजे तक लंबी कतार में लगे लोग बांसफाटक से लेकर चौक तक धक्कामुक्की करते नजर आए। सड़कों से गलियों तक हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। देश के कोने-कोने से वाहनों से आधी रात तक पहुंचने वाले वाहनों को खड़ा करने तक की जगह मिलनी मुश्किल हो गई। गंगा तट से लेकर गलियों, सड़कों तक चलना मुश्किल हो गया। आस्था का यह प्रवाह सड़कों पर उफान मारता रहा।
विज्ञापन
लोक मंगल का गान बाबा के सजे-संवरे मंदिरों, विग्रहों से शुरू हो गया। विश्वनाथ मंदिर को बेला, गुलाब, कुंद, गेंदा के फूलों से सजाने का काम देर शाम तक पूरा कर लिया गया। इसी के साथ स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन की छटा फूलों की खुशबू में और भी निखर कर हर तन-मन को प्रफुल्लित कर रही है।
विज्ञापन