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गंगा की दशा से हावर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर व्यथित
Varanasi
Updated Sat, 19 Jan 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। हावर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डायना एल. ऐक अपने आठ छात्रों के साथ इन दिनों वाराणसी में हैं। वह गंगा के बारे में अध्ययन कर रही हैं। काशी में पतितपावनी की हालत देखकर वह व्यथित हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र से भी बात की है। अपनी नई किताब ‘इंडिया ए सेक्रेड जियोग्राफी’ में भी उन्होंने गंगा के महत्व के बारे में लिखा है। प्रो. डायना अपने छात्रों के साथ तीन दिन कुंभ में भी रहेंगी।
हावर्ड विश्वविद्यालय की धार्मिक महत्व एवं जीवन शैली की प्रोफेसर डायना एल. ऐक पहली बार लगभग 30 साल पहले काशी आई थीं। पिछले बार करीब बारह साल पूर्व वे यहां आईं थीं और गंगा निर्मलीकरण के प्रयासों का जायजा लिया था। 1999 में उन्होंने ‘बनारस : सिटी ऑफ लाइट’ किताब लिखी थी। प्रो. डायना अस्सी घाट स्थित एक होटल में वह रुकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले बारह सालों में गंगा ज्यादा मैली हुई हैं। निर्मलीकरण को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली है। उनका कहना है कि पूरे विश्व में गंगा हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इसे सहेजना सबकी जिम्मेदारी है। प्रो. डायना शनिवार को को कुंभ के लिए रवाना होंगी। वहां वे चिदानंद मुनि जी महाराज समेत अन्य संतों से मुलाकात करेंगी।
नोट- इंटरनेट से निकाली गई प्रो. डायना की पर्सनालिटी फोटो है
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हावर्ड विश्वविद्यालय की धार्मिक महत्व एवं जीवन शैली की प्रोफेसर डायना एल. ऐक पहली बार लगभग 30 साल पहले काशी आई थीं। पिछले बार करीब बारह साल पूर्व वे यहां आईं थीं और गंगा निर्मलीकरण के प्रयासों का जायजा लिया था। 1999 में उन्होंने ‘बनारस : सिटी ऑफ लाइट’ किताब लिखी थी। प्रो. डायना अस्सी घाट स्थित एक होटल में वह रुकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले बारह सालों में गंगा ज्यादा मैली हुई हैं। निर्मलीकरण को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली है। उनका कहना है कि पूरे विश्व में गंगा हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। इसे सहेजना सबकी जिम्मेदारी है। प्रो. डायना शनिवार को को कुंभ के लिए रवाना होंगी। वहां वे चिदानंद मुनि जी महाराज समेत अन्य संतों से मुलाकात करेंगी।
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नोट- इंटरनेट से निकाली गई प्रो. डायना की पर्सनालिटी फोटो है