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सरैंया में शिया और सुन्नी भिड़े
Varanasi
Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सरैंया इमामबाड़ा के सामने रविवार की दोपहर मामूली बात को लेकर शिया और सुन्नी समुदाय के बीच पथराव शुरू होने से भगदड़ मच गई। पुलिस ने तत्काल शिया समुदाय से जुड़े लोगों को इमामबाड़े में बंद कर दिया। आरएएफ और पीएसी की कंपनियां भी बुला ली गईं। घंटों मशक्कत के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने गुस्साए लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद ताजियों के दफन होने का सिलसिला शुरू हुआ। मंडलायुक्त चंचल तिवारी और आईजी जीएल मीणा भी हालात का जायजा लेने मौके पर पहुंच गए थे।
जैतपुरा इलाके से शिया समुदाय के लोग रविवार की दोपहर ताजिया लेकर सरैया इमामबाड़ा जा रहे थे। रास्ते में जंजीरों के मातम के दौरान कुछ लोगों को धक्का लग गया। इमामबाड़ा पहुंचने पर सुन्नी समुदाय के लोगों ने धक्का लगने की घटना पर एतराज जताया। दोनों पक्ष एक दूसरे पर समय बर्बाद करने का आरोप लगाने लगे। गर्मागर्म बहस के बीच ही दोनों तरफ से पथराव होने लगा। पथराव से कई लोगों के घायल होने पर भगदड़ मच गई। एसपी सिटी संतोष सिंह ने तत्काल शिया समुदाय के लोगों को इमामबाड़े में बंद कर दिया। धक्का-मुक्की के बीच एसपी सिटी को भी एक डंडा लग गया। घटना की जानकारी मिलते ही डीआईजी ए. सतीश गणेश, जिलाधिकारी सौरभ बाबू और एसएसपी बीडी पाल्सन काफी संख्या में फोर्स लेकर मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने शहर के संभ्रांत लोगों की मदद से गुस्साए लोगों को हटाकर रास्ता साफ कराया। मान मनौव्वल के बाद ताजिया दफन होने लगे। इधर, शाम को जलालीपुरा चुंगी के समीप कमलगड़हा और जलालीपुरा के ताजिया जुलूस में शामिल लोग एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में भिड़ गए। काजीपुरा और बटाऊशहीद के ताजिया जुलूस में शामिल लोगों के बीच भी पथराव हुआ। बुजुर्गोें के हस्तक्षेप करने पर दोनों पक्ष शांत हुए। इसी प्रकार कटेहर और रसूलपुरा के जुलूस के बीच विवाद के चलते कुछ देर के लिए ताजिये रोक दिए गए थे। अर्दली बाजार स्थित उल्फत बीबी हाते से निकला दुलदुल का जुलूस भी रास्ते के विवाद में फंस गया था। दूसरे रास्ते जा रहे जुलूस को पुलिस ने नई परंपरा की शुरुआत बताते हुए रोक दिया। नोकझोंक के बाद परंपरागत रास्ते से जुलूस आगे रवाना हुआ। एसपी सिटी ने बताया कि शिया समुदाय के बच्चे और महिलाओं को पुलिस की गाड़ी से पहले ही वापस भेज दिया गया था। लेकिन, पुरुषों को रात नौ बजे इमामबाड़ा से जैतपुरा भेजा गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दोनों पक्ष कहीं फिर न भिड़ जाएं।
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जैतपुरा इलाके से शिया समुदाय के लोग रविवार की दोपहर ताजिया लेकर सरैया इमामबाड़ा जा रहे थे। रास्ते में जंजीरों के मातम के दौरान कुछ लोगों को धक्का लग गया। इमामबाड़ा पहुंचने पर सुन्नी समुदाय के लोगों ने धक्का लगने की घटना पर एतराज जताया। दोनों पक्ष एक दूसरे पर समय बर्बाद करने का आरोप लगाने लगे। गर्मागर्म बहस के बीच ही दोनों तरफ से पथराव होने लगा। पथराव से कई लोगों के घायल होने पर भगदड़ मच गई। एसपी सिटी संतोष सिंह ने तत्काल शिया समुदाय के लोगों को इमामबाड़े में बंद कर दिया। धक्का-मुक्की के बीच एसपी सिटी को भी एक डंडा लग गया। घटना की जानकारी मिलते ही डीआईजी ए. सतीश गणेश, जिलाधिकारी सौरभ बाबू और एसएसपी बीडी पाल्सन काफी संख्या में फोर्स लेकर मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने शहर के संभ्रांत लोगों की मदद से गुस्साए लोगों को हटाकर रास्ता साफ कराया। मान मनौव्वल के बाद ताजिया दफन होने लगे। इधर, शाम को जलालीपुरा चुंगी के समीप कमलगड़हा और जलालीपुरा के ताजिया जुलूस में शामिल लोग एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में भिड़ गए। काजीपुरा और बटाऊशहीद के ताजिया जुलूस में शामिल लोगों के बीच भी पथराव हुआ। बुजुर्गोें के हस्तक्षेप करने पर दोनों पक्ष शांत हुए। इसी प्रकार कटेहर और रसूलपुरा के जुलूस के बीच विवाद के चलते कुछ देर के लिए ताजिये रोक दिए गए थे। अर्दली बाजार स्थित उल्फत बीबी हाते से निकला दुलदुल का जुलूस भी रास्ते के विवाद में फंस गया था। दूसरे रास्ते जा रहे जुलूस को पुलिस ने नई परंपरा की शुरुआत बताते हुए रोक दिया। नोकझोंक के बाद परंपरागत रास्ते से जुलूस आगे रवाना हुआ। एसपी सिटी ने बताया कि शिया समुदाय के बच्चे और महिलाओं को पुलिस की गाड़ी से पहले ही वापस भेज दिया गया था। लेकिन, पुरुषों को रात नौ बजे इमामबाड़ा से जैतपुरा भेजा गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दोनों पक्ष कहीं फिर न भिड़ जाएं।
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