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लक्ष्मीबाई स्मारक का लोकार्पण करें राष्ट्रपति
Varanasi
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। महारानी लक्ष्मीबाई का स्मारक बनकर तैयार हो गया है। उसका लोकार्पण राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से कराने की मांग उठने लगी है। स्मारक के लिए जमीन देने वाले प्रो. वीरभद्र मिश्र भी चाहते हैं कि स्मारक की सड़क बेहतर हो जाए। उसके रखरखाव की अच्छी व्यवस्था हो। वह इसके लिए अपनी ओर से एक लाख 77 हजार रुपये देकर स्मारक कोष की शुरुआत कराने के पक्ष में हैं।
स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली की खोज भारत सरकार ने शुरू की तो पता चला कि वह भूमि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र के पास है। लगभग चार बिस्वा की इस जमीन को उन्होंने स्मारक बनाने के लिए प्रशासन को सौंप दिया। पर्यटन विभाग ने अब वहां स्मारक बना दिया है। तब प्रो. मिश्र ने संकल्प लिया था कि जब स्मारक तैयार हो जाएगा तो वह रानी लक्ष्मीबाई की प्रति जयंती के हिसाब से एक हजार रुपये की राशि देंगे। इस साल उनकी 177 वीं जयंती मनाई गई है। इस हिसाब से वह एक लाख 77 हजार रुपये स्मारक कोष में देना चाहते हैं। प्रो. मिश्र ने बताया कि स्मारक बेहद सुंदर बना है। इसको देखने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग आ रहे हैं। यहां का एप्रोच मार्ग बेहतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई से बड़ा कोई बलिदानी नहीं है और राष्ट्रपति से बड़ा कोई पद नहीं है। राष्ट्रपति 25 दिसंबर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय आ रहे हैं। पर्यटन विभाग को प्रयास करके उनसे लोकार्पण करवा चाहिए। बेहतर रखरखाव होगा तो देश भर के लोग यहां आकर प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे।
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स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली की खोज भारत सरकार ने शुरू की तो पता चला कि वह भूमि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र के पास है। लगभग चार बिस्वा की इस जमीन को उन्होंने स्मारक बनाने के लिए प्रशासन को सौंप दिया। पर्यटन विभाग ने अब वहां स्मारक बना दिया है। तब प्रो. मिश्र ने संकल्प लिया था कि जब स्मारक तैयार हो जाएगा तो वह रानी लक्ष्मीबाई की प्रति जयंती के हिसाब से एक हजार रुपये की राशि देंगे। इस साल उनकी 177 वीं जयंती मनाई गई है। इस हिसाब से वह एक लाख 77 हजार रुपये स्मारक कोष में देना चाहते हैं। प्रो. मिश्र ने बताया कि स्मारक बेहद सुंदर बना है। इसको देखने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग आ रहे हैं। यहां का एप्रोच मार्ग बेहतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई से बड़ा कोई बलिदानी नहीं है और राष्ट्रपति से बड़ा कोई पद नहीं है। राष्ट्रपति 25 दिसंबर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय आ रहे हैं। पर्यटन विभाग को प्रयास करके उनसे लोकार्पण करवा चाहिए। बेहतर रखरखाव होगा तो देश भर के लोग यहां आकर प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे।
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