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शंकराचार्य ने गंगा पर पीएमओ को चेताया

Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
Varanasi
Varanasi Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गंगा पर प्रस्तावित बांधों के भविष्य को लेकर गठित चतुर्वेदी समिति की रिपोर्ट शुक्रवार को सार्वजनिक न होने पर द्वारका-शारदा-ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने गहरी नाराजगी जताई है। शंकराचार्य ने पीएमओ से कहा कि वह गंगा पर तत्काल अपनी नीति स्पष्ट करे। आखिर किन वजहों से रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालकर अविरलता-निर्मलता के प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। शंकराचार्य ने चेताया कि अगर शीघ्र इस पर प्रधानमंत्री की ओर से सार्थक संदेश नहीं मिला तो अभियानम की ओर से देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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दो महीने के भीतर तीसरी बार रिपोर्ट टालने की जानकारी मिलने के बाद शंकराचार्य ने शुक्रवार की शाम फोन पर पीएमओ के मंत्री नारायण सामी से बातचीत की। पूछा कि वह प्रधानमंत्री से संपर्क कर उन्हें बताएं कि आखिर किन वजहों से गंगा की अविरलता-निर्मलता के मामले पर किनारा किया जा रहा है। केंद्र सरकार गंगा को बंधन मुक्त बनाने के सवाल पर क्यों रुख स्पष्ट नहीं करना चाहती। इसके बाद मिशन-2020 के निदेशक शत्रुघ्न सिंह से भी शंकराचार्य ने स्थिति की जानकारी ली। इसकी पुष्टि शंकराचार्य के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अमर उजाला से की। वार्ता के समय शंकराचार्य के साथ रहे गंगा सेवा अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि दो-तीन दिन तक पीएमओ के जवाब का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद, शंकराचार्य के निर्देशन में अभियानम का एक शिष्टमंडल दिल्ली पीएम से मिलने जाएगा। बांधों को रोकने की दिशा में माकूल जवाब न मिलने पर गंगा तपस्या फिर से शुरू हो जाएगी। इस बार शंकराचार्य देशव्यापी संघर्ष की घोषणा कर सकते हैं।
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कोट
पीएम को शंकराचार्य ने यह संदेश भी भिजवाया है कि अगर उत्तराखंड सरकार रेवेन्यू लास मेंटेन करने के लिए बांध बनाने पर अडिग है तो उसकी भरपाई की जाए। सरकार नहीं कर सकती तो बताए। उत्तराखंड सरकार का रेवेन्यू लास पूरा करने के लिए जन-जन से सहयोग लिया जाएगा लेकिन गंगा की अविलरता-निर्मलता से समझौता नहीं किया जा सकता। -स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, शंकराचार्य के प्रतिनिधि
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