गलियों के शहर में गलियां ही बदहाल

Varanasi Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
बनारस मंदिरों का शहर है जो गलियों में बसता है। बेशक शहर का विस्तार हो गया है लेकिन असल बनारस तो अब भी पक्के महाल में ही बसता है। पक्के महाल में पहुंचने का एक मात्र सहारा गलियां हैं जिनकी देखरेख करना तो दूर ऐसा प्रतीत होता है मानो जिला प्रशासन और नगर निगम ने इन गलियों की ओर से मुंह ही मोड़ लिया हो...
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। गलियों का शहर कहे जाने वाले शहर बनारस की सड़कें ही नहीं बल्कि गलियां भी बदहाल होती जा रही हैं। हल्ला हंगामा होने पर सड़कों की सुधि तो जिला प्रशासन ने ले भी ली लेकिन गलियों की दशा दिन-ब-दिन खराब ही होती जा रही है।
अमर उजाला संवाददाता ने भेलूपुर, दशाश्वमेध, चौक और कोतवाली थानानतर्गत आने वाले प्रमुख मोहल्लों की प्रमुख गलियों का अवलोकन किया। कोई गली ऐसी नहीं मिली जिसमें सौ कदम आराम से चला जा सके। गलियों के चौक उखड़े होने तो सामान्य बात है। शुरुआत भेलूपुर थाना अंतर्गत पड़ने वाले प्रमुख गलियों से की।
भेलूपुर- केदारघाट-मानसरोवर मार्ग पर चौकी घाट से आगे बढ़ते ही फलमंडी के पास नाले के ऊपर ढाला गया लिंटर दो जगह से धंस गया है। इसी गली के समानांतर सोनारपुरा पांडेय हवेली मार्ग पर बीते चार माह से न सिर्फ मैनहोल खुला है बल्कि मैनहोल के आसपास नाले के ऊपर लगाया गया पत्थर भी धंस चुका है। इस मार्ग पर दिन की अपेक्षा रात में यात्रियों का दबाव अधिक होता है। दक्षिण भारत से आने वाले यात्री आंध्रा आश्रम तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग से आगे बढ़ते हैं। बागहाड़ा-साईबाबा मंदिर मार्ग पर मैनहोल पर चौके रख कर किसी तरह लोग आ-जा रहे हैं। यह दशा बीते छह महीने से है।
दशाश्वमेध- बंगाली टोला मोहल्ले से शुरू होकर केदारघाट तक जाने वाली गली में हर दस कदम पर ठोकर है। कहीं चौका उखड़ा है तो कहीं मैनहोल धंसा है। मुंशी घाट मोहल्ले में स्थिति सबसे खराब है। सुबह-शाम मलजल पूरी गली में फैल जाता है। गली में बिछाए गए चौकों के बीच में बड़े-बड़े फांक हो गए हैं। वाहनों के पहिए इनमें पड़ते ही गिरने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। विगत छह महीने में बहुतेरे लोग यहां गिर कर चोटिल हो चुके हैं।
चौक- ब्रह्मनाल से संकठा मंदिर जाने वाले मार्ग के बीच में गऊमठ इलाका पड़ता है। ब्रह्मनाल से इस मार्ग पर आगे बढ़ते ही जाते वक्त ढाल चढ़नी पड़ती है। जहां से ढाल की शुरुआत है ठीक उसी जगह गली के चौके खतरनाक तरीके से धंसे हैं। ठठेरी बाजार-चौखंभा मार्ग पर भारतेंदु भवन के निकट मैनहोल के आसपास के चौके न सिर्फ उखड़ गए हैं बल्कि कभी भी धंस सकते हैं।
कोतवाली- गोपाल मंदिर के निकट भैरोबाजार से लेकर सूतटोला के कुछ पहले तक गली बुरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह से पेयजल की पाइप लाइन में लीकेज होने के कारण गली में जलजमाव रहता है। बिना बारिश के ही गली में हमेशा फिसलन बनी रहती है। दूध विनायक स्थित गोविंद माधव मंदिर मार्ग की हालत तो यह है कि गली में बिछाए गए किस चौके पर पंाव रखते ही उसके नीचे जमा गंदे पानी का छपका पड़ेगा, यह कोई नहीं समझ पाता क्योंकि पूरी गली की हालत ऐसी हो चुकी है।
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चंदा लगाकर बनवाई गली
वाराणसी। दशाश्वमेध थानांतर्गत बंगाली टोला पोस्टआफिस के निकट गली के चौके पिछले पांच महीने से उखड़े हुए थे। क्षेत्रीय लोग सभासद और नगर निगम में शिकायत कर कर के थक गए। कपड़े गंदे होने से लेकर खुद चोटिल होने तक का जोखिम उठा चुके क्षेत्रीय निवासियों ने आपस में चंदा करके गली बनवाई है।

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