तपिश से बेखबर रहा कैरियर का कारवां

Varanasi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। रोजगार मनमर्जी का होना चाहिए, तभी जीवन खुशहाल होगा। आज की युवा पीढ़ी इस बात पर पूरी तरह अमल करना चाहती है। जिंदगी में कुछ कर गुजरने की राह चुनौतियों से भरपूर है लेकिन उनके सामने कैरियर के तमाम विकल्प भी हैं। बस जरूरत है अपनी अभिरुचि के हिसाब से काम चुनना। सांस्कृतिक संकुल सभागार में अमर उजाला के दो दिवसीय लक्ष्य-12 के अंतिम दिन शनिवार को भी युवा मनमाफिक कैरियर की तलाश में पहुंचे। विश्वविद्यालयों और संस्थानों के स्टाल पर घू्मकर अपने मनमाफिक कैरियर आप्शन के बारे में जानकारी हासिल करते रहे।
रोज-ब-रोज रोजगार पाना मुश्किल हो रहा है। जैसे-जैसे जोखिम बढ़ रहा युवा पीढ़ी भी जुझारू हो रही है। वह कुछ भी और किसी कीमत पर करने को तैयार नहीं है। उनको मनमाफिक काम चाहिए। अपनी रुचि के मुताबिक, विषयों का अध्ययन करने का विकल्प उनके पास है तो वे काम भी उसी हिसाब से चाहते हैं। मौैजूदा पाठ्यक्रमों के दायरे में उनके सपने समा नहीं रहे हैं। निजी विश्वविद्यालयों ने उनकी जरूरतों के लिहाज से कुछ पाठ्यक्रम जरूर तैयार किए हैं। मथुरा की जीएलए यूनिवर्सिटी के पास बायोइंफार्मेटिक्स का पाठ्यक्रम है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के पास बायोटेक, फूड टेक्नालाजी, नैनो टेक्नालाजी में बीटेक और एमटेक और आयुर्वेद के बारे में जानकारी लेने तमाम युवा आए। इनवर्टिस के स्टाल पर बीटेक, एमबीए और बीटेक, एमटेक इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों, पत्रकारिता एवं जनसंचार जैसे विषयों के बारे में छात्रों ने पूछताछ की। प्रताप यूनिवर्सिटी में मास काम्युनिकेशन, एडवरटाइजिंग, मीडिया स्टडीज, फैशन, टेक्सटाइल, इंटीरियर डिजाइनिंग के पाठ्यक्रमों के बारे में पूछताछ की गई। बाबा फरीद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी देहरादून, माइक्रोटेक कालेज आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालाजी वाराणसी, आईईएस कालेज आफ टेक्नालाजी भोपाल, दीवान वीएस ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन मेरठ, एचआर ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन गाजियाबाद, अशोका इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट वाराणसी, जीएलए यूूनिवर्सिटी, केसी निट बांदा, एक्यूरेट ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन ग्रेटर नोएडा, जीएनआईटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन ग्रेटर नोएडा, एमपीजीआई ग्रुप कानपुर, आईआईएमटी ग्रुप आफ कालेजेस मेरठ, शीट कालेज आफ फार्मेसी एंड मैनेजमेंट वाराणसी, राधा गोविंद ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन मेरठ, देश भगत ग्रुप चंडीगढ़, फ्यूचर ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन बरेली, पटेल ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन, बियानी ग्रुप आफ कोएड कालेजेस जयपुर के स्टाल पर विभिन्न पाठ्यक्रमों और प्लेसमेंट की स्थिति के बारे में विद्यार्थी जानकारी लेते रहे।

एक्चूरियल साइंस को बनाएं कैरियर
वाराणसी। जैसे-जैसे विकास हो रहा है। रोजगार के नए-नए क्षेत्र भी सामने आ रहे हैं। कामर्स पढ़ने वालों के लिए बैकिंग, कंसल्टेंसी जैसे कैरियर विकल्प हैं। यदि किसी की गणित अच्छी हो तो उसके लिए एक्चूरियल साइंस का कैरियर आप्शन भी है। यह उभरता हुआ क्षेत्र है। बीमा कंपनियों का दायरा बढ़ रहा है। अब प्रतिष्ठान से लेकर खिलाड़ी के हाथ-पांव तक का बीमा हो रहा है। बीमा कंपनियां बड़े बीमों का मूल्यांकन करवाती हैं। एक्चूरियल साइंस का जानकार व्यक्ति बीमा कंपनियों को कंसल्टेंसी देता है। कंपनियां उसके मूल्यांकन के आधार पर भी किसी चीज का बीमा करती हैं। कई मामलों में तो बीमा कंपनियां अपने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा भी उनको देती हैं या फिर काम पर रखती हैं। कैरियर काउंसिलर जितिन चावला और तृप्ती शाहा से विद्यार्थियों ने इस बारे में भी सवाल पूछे। उन्होंने बकायदा विद्यार्थियों की काउंसिंलिग की। उनको अभिरुचि के हिसाब से कैरियर के बारे में सलाह दी।

जंगल का ज्ञान, दिलाए रोजगार
वाराणसी। जंगलों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। वानिकी के क्षेत्र में कैरियर की अपार संभावनाएं हैं। बाबा फरीद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी देहरादून में बीएससी फारेस्ट्री का पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। चार साल के इस पाठ्यक्रम को इंडियन कौंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च से अनुमति प्राप्त है। संस्थान के एचएस हीरा ने बताया कि वन हमें बहुत कुछ देते हैं। अब इस बात को महसूस किया जाने लगा है। वानिकी के पाठ्यक्रम में मौसम, पर्यावरण, वनों की उपज और उनकी उपयोगिता जैसे विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है। आज वनौषधियों के बारे में जानने का जोर बढ़ा है। बीएससी फारेस्ट्री करने वालों को फारेस्ट रिसर्च सेंटर और वन से जुड़े अन्य शोध संस्थानों में रोजगार मिलता है। हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी ऐसा ही पाठ्यक्रम है।

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