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गंगा मुद्दे को नई राजनीतिक धार देने में जुटे गोविंदाचार्य
Varanasi
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। 2007 में ग्राम, गऊ और गंगा के लिए मुहिम शुरू करने वाले भाजपा के पूर्व थिंक टैंक केएन गोविंदाचार्य गंगा के मौजूदा आंदोलन से खासे उत्साहित हैं। उन्होंने इस मुद्दे को नई राजनीतिक धार देने की पहल शुरू कर दी है। बुधवार को अंध विद्यालय में उन्होंने कहा भी कि हर दल में गंगा आंदोलन के समर्थकों को चिह्नित किया जा रहा है। ताकि इस मुद्दे को सभी मिलकर सदन में उठाएं।
स्पष्ट किया कि यह आम भारतीयों से जुड़ा ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई भी दल राजनीति नहीं कर सकता। यह मसला दलगत हितों से ऊपर का है। बकौल गोविंदाचार्य, इस मुद्दे पर फिलहाल चुप रहने वाले राजनेता और जनप्रतिनिधि अमीर परस्त, पूंजी परस्त और विदेशी परस्त हैं। लेकिन गरीब परस्त, भारत परस्त वाली सोच का नया माहौल आकार लेने लगा है। गंगा आंदोलन ने देश के हर प्रदेश के लोगों को वहां की नदियों की दुर्दशा के खिलाफ उठ खड़ा होने का संदेश देना शुरू कर चुका है। इससे राजनीति और अर्थनीति की नई समझ पैदा करने का समय भी अब आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा के साथ ही गांवों से जुड़ा आंदोलन भी स्वाभाविक तौर पर उभार लेने को है।
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स्पष्ट किया कि यह आम भारतीयों से जुड़ा ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई भी दल राजनीति नहीं कर सकता। यह मसला दलगत हितों से ऊपर का है। बकौल गोविंदाचार्य, इस मुद्दे पर फिलहाल चुप रहने वाले राजनेता और जनप्रतिनिधि अमीर परस्त, पूंजी परस्त और विदेशी परस्त हैं। लेकिन गरीब परस्त, भारत परस्त वाली सोच का नया माहौल आकार लेने लगा है। गंगा आंदोलन ने देश के हर प्रदेश के लोगों को वहां की नदियों की दुर्दशा के खिलाफ उठ खड़ा होने का संदेश देना शुरू कर चुका है। इससे राजनीति और अर्थनीति की नई समझ पैदा करने का समय भी अब आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा के साथ ही गांवों से जुड़ा आंदोलन भी स्वाभाविक तौर पर उभार लेने को है।
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