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फिर लामबंद होने लगे हैं माफिया गिरोह
Varanasi
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। शासन की सख्ती के चलते भले ही पूर्वांचल के दस जिलों से माफिया गिरोह मोबाइल कंपनी के टॉवर में तेल डालने के काम से पीछे हट गए हों, लेकिन एक कंपनी के टॉवर पर अब भी एक गिरोह हावी है। जेल में बंद माफिया गैंग का सरगना टॉवर में तेल डालने से लेकर उसकी मरम्मत तक का ठेका संभाले है। यही वजह है कि करोड़ों के इस धंधे में उसका वर्चस्व तोड़ने के लिए अन्य माफिया गिरोह भी लामबंद होने लगे हैं।
पूर्वांचल में नई-नई मोबाइल कंपनियों के आने पर टॉवर में तेल भरने के लिए माफिया गिरोहों के बीच पिछले साल तक जंग छिड़ी थी। इस धंधे को हथियाने के लिए आए दिन जिलों में मारकाट मची रहती थी। गिरोह कंपनियों के अधिकारियों की गर्दन पर पिस्टल रखकर ठेका हासिल कर ले रहे थे। ऐसे में कंपनियों ने यह मामला प्रदेश शासन के आला अधिकारियों तक पहुंचा दिया। इस मामले में पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कंपनियों को भरोसा दिलाया था कि किसी टॉवर के लिए माफियागिरी नहीं होने दी जाएगी। शासन से निर्देश मिलते ही धड़ाधड़ मुकदमे दर्ज होने लगे। अब भी कई माफिया गिरोह के कई सदस्यों पर मुकदमे चल रहे हैं।
शासन से सहयोग मिलने से उत्साहित मोबाइल कंपनियों ने भी धीरे-धीरे टॉवर के लिए स्थानीय स्तर पर तेल खरीद की नीति अपनानी शुरू कर दी। इसके अलावा तेल देने के लिए उन्होंने भारी भरकम सिक्योरिटी मनी निर्धारित कर दी। इन सख्त नियमों के चलते माफिया गिरोह के सदस्य गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही समेत दस जिलों से पीछे हट गए। जौनपुर का एक दबंग तो यह काम छोड़कर फाइवर लाइन बिछवाने और कंपनियों के प्रचार-प्रसार में जुट गया, मगर एक गिरोह ने अब भी एक कंपनी के दस जिलों के टॉवर में तेल डालने और मरम्मत करने का ठेका ले रखा है। इस गैंग का सरगना प्रदेश से बाहर रहते हुए भी धंधे का संचालन कर रहा है।
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पूर्वांचल में नई-नई मोबाइल कंपनियों के आने पर टॉवर में तेल भरने के लिए माफिया गिरोहों के बीच पिछले साल तक जंग छिड़ी थी। इस धंधे को हथियाने के लिए आए दिन जिलों में मारकाट मची रहती थी। गिरोह कंपनियों के अधिकारियों की गर्दन पर पिस्टल रखकर ठेका हासिल कर ले रहे थे। ऐसे में कंपनियों ने यह मामला प्रदेश शासन के आला अधिकारियों तक पहुंचा दिया। इस मामले में पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कंपनियों को भरोसा दिलाया था कि किसी टॉवर के लिए माफियागिरी नहीं होने दी जाएगी। शासन से निर्देश मिलते ही धड़ाधड़ मुकदमे दर्ज होने लगे। अब भी कई माफिया गिरोह के कई सदस्यों पर मुकदमे चल रहे हैं।
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शासन से सहयोग मिलने से उत्साहित मोबाइल कंपनियों ने भी धीरे-धीरे टॉवर के लिए स्थानीय स्तर पर तेल खरीद की नीति अपनानी शुरू कर दी। इसके अलावा तेल देने के लिए उन्होंने भारी भरकम सिक्योरिटी मनी निर्धारित कर दी। इन सख्त नियमों के चलते माफिया गिरोह के सदस्य गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही समेत दस जिलों से पीछे हट गए। जौनपुर का एक दबंग तो यह काम छोड़कर फाइवर लाइन बिछवाने और कंपनियों के प्रचार-प्रसार में जुट गया, मगर एक गिरोह ने अब भी एक कंपनी के दस जिलों के टॉवर में तेल डालने और मरम्मत करने का ठेका ले रखा है। इस गैंग का सरगना प्रदेश से बाहर रहते हुए भी धंधे का संचालन कर रहा है।
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