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बीएचयू में टीबी के गंभीर रोगियों का भी होगा इलाज
Varanasi
Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में जुलाई से टीबी के गंभीर मरीजों का भी उपचार हो सकेगा। बीएचयू प्रशासन ने अस्पताल परिसर में डाट्स प्लस सेंटर स्थापित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। पच्चीस बेड वाले इस सेंटर में पूर्वांचल के 14 मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा।
सर सुंदर लाल अस्पताल में डाट्स प्लस सेंटर नहीं होने से अब तक ऐसे मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं थी जिनमें प्रथम चरण की दवा में प्रतिरोध उत्पन्न हो गया और उनपर दवाआें का असर नहीं हो रहा था, परंतु अब ऐसे मरीजों का भी यहां उपचार हो सकेगा। इस सेंटर में डाट्स प्लस की दवाएं मुक्त दी जाएंगी। प्रथम चरण में वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़ और गोरखपुर मंडलाें के जिलाें को चुना गया है। बाद में इसका विस्तार किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. यूके वर्मा ने सर सुंदर लाल अस्पताल में सेंटर स्थापित करने के लिए बीएचयू प्रशासन को आवेदन दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया। साथ ही इसके लिए स्थान भी आवंटित कर दिया गया है। डा. वर्मा ने बताया कि इस सेंटर को स्थापित करने में बीएचयू के कुलपति डा. लालजी सिंह और आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा का विशेष योगदान है। उन्हाेंने बताया कि ऐसे मरीजों की कल्चर एंड ड्रग सेंस्टिविटी टेस्ट (सीएनडीएसटी) की जांच के लिए लैब स्थापित करने का प्रयास चल रहा है। जिनेट मशीन बीएचयू और शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीर चौरा में स्थापित करने की पहल शुरू हो गई है।
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सर सुंदर लाल अस्पताल में डाट्स प्लस सेंटर नहीं होने से अब तक ऐसे मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं थी जिनमें प्रथम चरण की दवा में प्रतिरोध उत्पन्न हो गया और उनपर दवाआें का असर नहीं हो रहा था, परंतु अब ऐसे मरीजों का भी यहां उपचार हो सकेगा। इस सेंटर में डाट्स प्लस की दवाएं मुक्त दी जाएंगी। प्रथम चरण में वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़ और गोरखपुर मंडलाें के जिलाें को चुना गया है। बाद में इसका विस्तार किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. यूके वर्मा ने सर सुंदर लाल अस्पताल में सेंटर स्थापित करने के लिए बीएचयू प्रशासन को आवेदन दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया। साथ ही इसके लिए स्थान भी आवंटित कर दिया गया है। डा. वर्मा ने बताया कि इस सेंटर को स्थापित करने में बीएचयू के कुलपति डा. लालजी सिंह और आईएमएस निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा का विशेष योगदान है। उन्हाेंने बताया कि ऐसे मरीजों की कल्चर एंड ड्रग सेंस्टिविटी टेस्ट (सीएनडीएसटी) की जांच के लिए लैब स्थापित करने का प्रयास चल रहा है। जिनेट मशीन बीएचयू और शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीर चौरा में स्थापित करने की पहल शुरू हो गई है।
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