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चंद्र ग्रहण के बाद खुले मंदिरों के कपाट
Varanasi
Updated Fri, 10 Oct 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। खंडग्रास चंद्र ग्रहण के दौरान बुधवार को अपराह्न 2.45 से शाम 6.06 बजे तक काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर समेत अन्य सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। ग्रहण काल खत्म होने के बाद जहां मंदिरों के कपाट खोले गए, वहीं श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और दर्शन-पूजन कर सुख-शांति की कामना की।
अश्विन शुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा पर हुई इस खगोलीय घटना का तमाम लोगों ने छतों, मैदानों और गंगा घाटों पर पहुंचकर नजारा भी लिया। चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। उधर, मोक्ष के लिए घरों, मंदिरों में अनुष्ठान भी किए गए। शाम 6.06 बजे जैसे ही ग्रहण काल खत्म हुआ, गंगा घाट पर स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान, दान के बाद लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, संकट मोचन और काल भैरव समेत अन्य मंदिरों की ओर श्रद्धालुओं ने रुख किया। यहां लोगों ने देवी-देवताओं की अर्चना कर मोक्ष की कामना की।
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अश्विन शुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा पर हुई इस खगोलीय घटना का तमाम लोगों ने छतों, मैदानों और गंगा घाटों पर पहुंचकर नजारा भी लिया। चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। उधर, मोक्ष के लिए घरों, मंदिरों में अनुष्ठान भी किए गए। शाम 6.06 बजे जैसे ही ग्रहण काल खत्म हुआ, गंगा घाट पर स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान, दान के बाद लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, संकट मोचन और काल भैरव समेत अन्य मंदिरों की ओर श्रद्धालुओं ने रुख किया। यहां लोगों ने देवी-देवताओं की अर्चना कर मोक्ष की कामना की।
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