{"_id":"140-140302","slug":"Varanasi-140302-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्नेल विश्वविद्यालय और बीएचयू में हो बेहतर संबंध ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्नेल विश्वविद्यालय और बीएचयू में हो बेहतर संबंध
Varanasi
Updated Sat, 20 Sep 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू में संचालित शिक्षण उत्कृष्टता एवं अध्ययन केंद्र और कृषि नवोन्मेषण सहभागिता के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘शिक्षण, उत्कृष्टता एवं अध्ययन’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। बतौर मुख्य अतिथि कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के रेक्टर प्रो. कमलशील ने अमेरिका के कार्नेल विश्वविद्यालय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर जोर दिया। कहा कि कार्नेल विश्वविद्यालय के कालेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड लाइफ साइंसेज की ओर से चलाए जा रहे कृषि नवोन्मेषण सहभागिता के माध्यम से न सिर्फ शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि इससे विद्यार्थियों को भी लाभ होगा।
विशिष्ट अतिथि यूजीसी एकेडमिक स्टाफ कालेज, बीएचयू के निदेशक प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने कहा कि कृषि को केंद्र मानकर ही देश का वार्षिक बजट बनाया जाता है। इस लिहाज से संस्थान द्वारा शिक्षण की उत्कृष्टता को ध्यान में रखकर ही अध्यापन कराया जाना चाहिए। स्वागत कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने किया। समन्वयक प्रो. एपी सिंह ने कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी। संचालन प्रो. ओपी मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एके सिंह ने किया। प्रो. सुनील कुमार सिंह और प्रो. जेपी श्रीवास्तव ने पाठ्यक्रम विकास पर अपने विचार रखे।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि यूजीसी एकेडमिक स्टाफ कालेज, बीएचयू के निदेशक प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने कहा कि कृषि को केंद्र मानकर ही देश का वार्षिक बजट बनाया जाता है। इस लिहाज से संस्थान द्वारा शिक्षण की उत्कृष्टता को ध्यान में रखकर ही अध्यापन कराया जाना चाहिए। स्वागत कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने किया। समन्वयक प्रो. एपी सिंह ने कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी। संचालन प्रो. ओपी मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एके सिंह ने किया। प्रो. सुनील कुमार सिंह और प्रो. जेपी श्रीवास्तव ने पाठ्यक्रम विकास पर अपने विचार रखे।
विज्ञापन