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उस्ताद की शहनाई पर परिवार में विवाद
Varanasi
Updated Thu, 11 Sep 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई को लेकर उनके परिवार में विवाद खड़ा हो गया है। परिवार के कुछ सदस्य शहनाई गुम होने की बात स्वीकार कर रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि उस्ताद के तीसरे पुत्र नैयर हुसैन के 2009 में इंतकाल के बाद से ही चार में से एक शहनाई नहीं दिखी है। इस बीच बुधवार को उस्ताद के कमरे में उनकी चारपाई पर तीन शहनाइयां रखी मिलीं। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि परिवार के सदस्यों ने चोरी की घटना से इनकार किया है।
महफिलों में जो शहनाई उस्ताद के हाथ की शोभा होती थी, वह कब और कैसे गुम हो गई? इस पर परिवार के सदस्य अलग-अलग बातें कह रहे हैं। उस्ताद के कक्ष की चाबी रखने वाले उनके चौथे पुत्र काजिम ने हड़हा सराय स्थित घर पर बताया कि अब्बा के इंतकाल के बाद उनकी शहनाई से उनके तीसरे भाई नैयर हुसैन रियाज करते थे। वर्ष 2009 में उनके इंतकाल के बाद से वह शहनाई नहीं दिखी। जबकि उस्ताद के सबसे छोटे पुत्र नाजिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में जाकर शहनाई और कई और कीमती वस्तुओं के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। कार्यालय के प्रमुख शिव शरण पाठक ने बताया कि उस्ताद से जुड़े इस प्रकरण की फाइल गुरुवार तक पीएमओ को भेज दी जाएगी। इसी बीच यह बात सामने आई कि उस्ताद के एक पुत्र जामिन हुसैन ने एक शहनाई बंगलूरू के संस्थान को भेंट की है। इस बाबत उस्ताद के बड़े पुत्र मेहताब हुसैन ने दावा किया कि बंगलूरू में रखी गई शहनाई वो नहीं है जिससे उस्ताद रियाज किया करते थे।
मामला चर्चा में आने के बाद एसएसपी योगेंद्र कुमार के निर्देश पर जांच के लिए सीओ दशाश्वमेध डीपी शुक्ला एवं इंस्पेक्टर एसएस ग्रोवर उस्ताद के घर पहुंचे तो उन्हें कमरे में चारपाई पर तीन शहनाइयां रखी दिखीं। खां साहब के पौत्र सिब्तेन और पुत्र मेहताब हुसैन ने बताया कि उस्ताद चार शहनाइयां बजाते थे। उनमें से एक उनके पुत्र नैयर हुसेन ने वर्ष 2007 में किसी को रियाज के लिए दे दिया था। सिब्तेन का यह भी कहना है कि उस्ताद के कमरे में ताला बंद रहता हैं। बिना ताला टूटे शहनाई चोरी का प्रश्न ही नहीं है? परिवार के ही कुछ लोग मकान को लेकर उपजे विवाद के चलते इस मामले को बेेवजह तूल दे रहे हैं।
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कोट्स ----
जांच में पता लगा है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मकान में मेहताब हुसैन एवं उनके पुत्र सिब्तेन रहते हैं। उन्होंने लिखित रूप से पुलिस को अवगत कराया है कि उनके यहां से कोई शहनाई चोरी नहीं हुई है। उन्होंने सिल्वर कलर की शहनाई का फोटो खींचकर पुलिस को दी है।
- जोगेंद्र कुमार, एसएसपी
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महफिलों में जो शहनाई उस्ताद के हाथ की शोभा होती थी, वह कब और कैसे गुम हो गई? इस पर परिवार के सदस्य अलग-अलग बातें कह रहे हैं। उस्ताद के कक्ष की चाबी रखने वाले उनके चौथे पुत्र काजिम ने हड़हा सराय स्थित घर पर बताया कि अब्बा के इंतकाल के बाद उनकी शहनाई से उनके तीसरे भाई नैयर हुसैन रियाज करते थे। वर्ष 2009 में उनके इंतकाल के बाद से वह शहनाई नहीं दिखी। जबकि उस्ताद के सबसे छोटे पुत्र नाजिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में जाकर शहनाई और कई और कीमती वस्तुओं के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। कार्यालय के प्रमुख शिव शरण पाठक ने बताया कि उस्ताद से जुड़े इस प्रकरण की फाइल गुरुवार तक पीएमओ को भेज दी जाएगी। इसी बीच यह बात सामने आई कि उस्ताद के एक पुत्र जामिन हुसैन ने एक शहनाई बंगलूरू के संस्थान को भेंट की है। इस बाबत उस्ताद के बड़े पुत्र मेहताब हुसैन ने दावा किया कि बंगलूरू में रखी गई शहनाई वो नहीं है जिससे उस्ताद रियाज किया करते थे।
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मामला चर्चा में आने के बाद एसएसपी योगेंद्र कुमार के निर्देश पर जांच के लिए सीओ दशाश्वमेध डीपी शुक्ला एवं इंस्पेक्टर एसएस ग्रोवर उस्ताद के घर पहुंचे तो उन्हें कमरे में चारपाई पर तीन शहनाइयां रखी दिखीं। खां साहब के पौत्र सिब्तेन और पुत्र मेहताब हुसैन ने बताया कि उस्ताद चार शहनाइयां बजाते थे। उनमें से एक उनके पुत्र नैयर हुसेन ने वर्ष 2007 में किसी को रियाज के लिए दे दिया था। सिब्तेन का यह भी कहना है कि उस्ताद के कमरे में ताला बंद रहता हैं। बिना ताला टूटे शहनाई चोरी का प्रश्न ही नहीं है? परिवार के ही कुछ लोग मकान को लेकर उपजे विवाद के चलते इस मामले को बेेवजह तूल दे रहे हैं।
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जांच में पता लगा है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मकान में मेहताब हुसैन एवं उनके पुत्र सिब्तेन रहते हैं। उन्होंने लिखित रूप से पुलिस को अवगत कराया है कि उनके यहां से कोई शहनाई चोरी नहीं हुई है। उन्होंने सिल्वर कलर की शहनाई का फोटो खींचकर पुलिस को दी है।
- जोगेंद्र कुमार, एसएसपी