{"_id":"140-135521","slug":"Varanasi-135521-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं कमर तो कहीं घुटने तक भरा पानी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं कमर तो कहीं घुटने तक भरा पानी
Varanasi
Updated Sat, 19 Jul 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। रात की बारिश ने शुक्रवार सुबह तक मौसम तो सुहाना कर दिया लेकिन शहर की सड़कों पर कहीं घुटने तक जल जमाव हो गया तो कहीं कमर भर। नगर निगम ने बारिश के पहले नालों की सफाई नहीं कराई थी, जिसके चलते सड़कें जलमग्न हैं। निगम के पास 39 पंप होने के बावजूद पानी निकालने के लिए सिर्फ 10 पंप लगाए गए हैं। जबकि, 45 से ज्यादा मुहल्लों में सड़कों और घरों में पानी हिलोरें ले रहा है।
रथयात्रा से गोदौलिया, सोनिया से औरंगाबाद, पुराना पानदरीबा, बाबा कीनाराम क्रीं कुंड से लेकर लंका तक, लंका से नरिया, सिगरा से महमूरगंज तक सड़कों पर पानी भरा। सिगरा घंटी मिल के पीछे से लगायत सनबीम स्कूल लहरतारा, जल विहार कालोनी से गणेश बाग नर्सरी, शिवाजी नगर तिराहा, बैंक कालोनी सिगरा तिराहे तक भी सड़कों पर कहीं कमर तो कहीं घुटने भर पानी लगा। जलभराव से कई जगहों पर सड़कें खराब हो गई हैं। दशाश्वमेध की दुकानों में पानी घुस गया जबकि घाटों के सहारे दोपहर तक झरने की तरह पानी गंगा में गिरता रहा। जलभराव से सबसे अधिक दयनीय स्थिति रेलवे के जल विहार, सिगरा स्थित अन्नपूर्णा नगर कालोनी, संत रघुवर नगर कालोनी, शिवाजी नगर कालोनी, रविंद्रपुरी कालोनी, साकेत नगर, कबीर नगर, बालाजी कालोनी और नेवादा आदि स्थानों पर रही। इन कालोनियों में कई घरों में पानी घुस गया। जल विहार कालोनी में लोग घरों से पानी निकालने में जुटे रहे। अपराह्न तीन बजे तक कालोनी की सड़कों पर डेढ़ फुट तक पानी लगा रहा। इन कालोनियों में सड़क नाला, पोखरी की पहचान करना मुश्किल हो गया। साकेत नगर, गांधी नगर, रोहित नगर और कौशलेश नगर में जल भराव के चलते लोग शाम तक घरों से बाहर नहीं निकल पाए। स्थानीय पार्षद वरुण सिंह के नेतृत्व में युवकों ने घरों तक जरूरी सामग्री पहुंचाई। अन्नपूर्णा नगर कालोनी के जयदीप लहरी ने बताया कि आधे घंटे की बारिश में कालोनी में पानी भर जाता है और यहां की समिति समस्या का निदान नहीं कर पा रही है। ठेकेदार अजय उपाध्याय ने बताया कि पिछले साल पानी में डूबने से उनकी कार खराब हो गई थी और इस बार भी बारिश के पानी में वाहन डूबे हैं। झारखंडे ठाकुर ने तो दूसरी कालोनी में वाहन खड़े किए हैं। अनुप्रिया श्रीवास्तव ने नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतनिधियों पर अनदेखी करने का आरोप लगाया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एसएसपी वर्मा का कहना है कि प्रवेश के मुख्य मार्ग से अन्नपूर्णा नगर कालोनी की सड़क नीची है। ढलान भी कालोनी की ओर है। जल निकासी का प्रवाह शिवपुरवा की ओर है। शिवपुरवा मार्ग पर खुदाई और सफाई ठीक ढंग से नहीं होने के कारण कालोनी का पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। नाला निर्माण पूरा हो जाने पर समस्या हल हो जाएगी।
सरैंया और बजरडीहा में करघे डूब जाने से साडि़यों का उत्पादन ठप हो गया है। सोनिया में पोखरे की जलकुंभियां नालियों में भर गई हैं, जिससे आसपास के मुहल्लों में जल भराव हो गया है। कमिश्नरी, कलेक्ट्रेट, सर्किट हाउस, विकास भवन, तहसील परिसर में भी बारिश के चलते पानी लगा रहा। जलभराव की सूचना पर सिगरा पहुंचे एडीएम सिटी एमपी सिंह ने नगर निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलवाया और चार पंप के जरिए महमूरगंज से पानी निकलवाया।
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नगर निगम जलमग्न
वाराणसी। नगर निगम दूसरों के घरों से पानी क्या बाहर निकालेगा, उसके अपने परिसर में ही पानी भरा हुआ है। मिनी सदन, टेनिस कोर्ट, गुलाब बाग, शहीद उद्यान में पानी भर गया है। नगर निगम के बेसमेंट में भी ऐसी ही स्थिति है। ये हालात तब हैं जब नालों की सफाई के लिए निगम ने 70 लाख रुपये खर्च किए हैं। इसके बावजूद अभियंताओं के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं है। उनका दावा है कि सफाई नहीं हुई तो पानी निकला कैसे जबकि शहर के विभिन्न मुहल्लों में जलभराव को देखते हुए दोपहर में महापौर रामगोपाल मोहले ने जोनल अधिकारियों को क्षेत्र में भेजा।
मनमानी ने बिगाड़ी वर्षा जल निकासी की व्यवस्था
सीवर, ड्रेनेज पाइप लाइन की डिजाइन में नहीं बल्कि प्लानिंग में कमी है। शहर में जायका या अन्य एजेंसियों द्वारा सीवेज, ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने के जो भी काम किए जाते हैं, उनके इंजीनियर डिजाइन का परीक्षण कराने के लिए ले आते हैं। डिजाइन में जो कमियां होती हैं, उन्हें ठीक किया जाता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर वे उस डिजाइन को पूरी तरह अमल में नहीं लाते। अक्सर ऐसा होता है कि ठेकेदार तय मानक का ख्याल नहीं रखते। कहीं कहीं पानी के बहाव के लिए पाइप लाइन का जो स्लोप (ढलान) होना चाहिए वह ही नहीं होता। सीवर और बारिश के पानी के निकास की अलग-अलग पाइप लाइन होनी चाहिए। इन दोनों सिस्टम को आपस में जोड़े जाने से स्टॉर्म ड्रेन सिस्टम यानी वर्षा जल निकासी की व्यवस्था बिगड़ गई है। कार्यदायी संस्थाओं में आपसी तालमेल की कमी भी दिखती है। नई सीवर, ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाई तो गई है लेकिन जब तक एसटीपी नहीं बन जाता उसका लाभ नहीं मिल सकता। एसटीपी बनने के बाद इसके चालू होने पर निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
- डॉ. केके पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग, आईआईटी बीएचयू।
इलाज कराने तक नहीं पहुुंच पाए लोग
वाराणसी (ब्यूरो)। बारिश के बाद शहर में जगह-जगह जलजमाव के कारण बीमारों घर से निकलकर दुश्वारी उठाने के बजाय तकलीफ बर्दाश्त करना बेहतर समझा। इसके चलते कबीरचौरा स्थित शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल और पांडेयपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में अन्य दिनों की तुलना में शुक्रवार को मरीजों की संख्या कम रही। कबीरचौरा अस्पताल में गुरुवार को करीब 900 मरीज पहुंचे थे जबकि शुक्रवार को 598 ही पहुंचे। इसी तरह दीनदयाल अस्पताल में गुरुवार को 870 मरीज पहुंचे थे जबकि शुक्रवार को 430 मरीज ही पहुंचे। बीएचयू सिंहद्वार से लेकर अस्पताल के ओपीडी तक जलभराव के चलते मरीजों को खासी तकलीफ उठानी पड़ी।
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रथयात्रा से गोदौलिया, सोनिया से औरंगाबाद, पुराना पानदरीबा, बाबा कीनाराम क्रीं कुंड से लेकर लंका तक, लंका से नरिया, सिगरा से महमूरगंज तक सड़कों पर पानी भरा। सिगरा घंटी मिल के पीछे से लगायत सनबीम स्कूल लहरतारा, जल विहार कालोनी से गणेश बाग नर्सरी, शिवाजी नगर तिराहा, बैंक कालोनी सिगरा तिराहे तक भी सड़कों पर कहीं कमर तो कहीं घुटने भर पानी लगा। जलभराव से कई जगहों पर सड़कें खराब हो गई हैं। दशाश्वमेध की दुकानों में पानी घुस गया जबकि घाटों के सहारे दोपहर तक झरने की तरह पानी गंगा में गिरता रहा। जलभराव से सबसे अधिक दयनीय स्थिति रेलवे के जल विहार, सिगरा स्थित अन्नपूर्णा नगर कालोनी, संत रघुवर नगर कालोनी, शिवाजी नगर कालोनी, रविंद्रपुरी कालोनी, साकेत नगर, कबीर नगर, बालाजी कालोनी और नेवादा आदि स्थानों पर रही। इन कालोनियों में कई घरों में पानी घुस गया। जल विहार कालोनी में लोग घरों से पानी निकालने में जुटे रहे। अपराह्न तीन बजे तक कालोनी की सड़कों पर डेढ़ फुट तक पानी लगा रहा। इन कालोनियों में सड़क नाला, पोखरी की पहचान करना मुश्किल हो गया। साकेत नगर, गांधी नगर, रोहित नगर और कौशलेश नगर में जल भराव के चलते लोग शाम तक घरों से बाहर नहीं निकल पाए। स्थानीय पार्षद वरुण सिंह के नेतृत्व में युवकों ने घरों तक जरूरी सामग्री पहुंचाई। अन्नपूर्णा नगर कालोनी के जयदीप लहरी ने बताया कि आधे घंटे की बारिश में कालोनी में पानी भर जाता है और यहां की समिति समस्या का निदान नहीं कर पा रही है। ठेकेदार अजय उपाध्याय ने बताया कि पिछले साल पानी में डूबने से उनकी कार खराब हो गई थी और इस बार भी बारिश के पानी में वाहन डूबे हैं। झारखंडे ठाकुर ने तो दूसरी कालोनी में वाहन खड़े किए हैं। अनुप्रिया श्रीवास्तव ने नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतनिधियों पर अनदेखी करने का आरोप लगाया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एसएसपी वर्मा का कहना है कि प्रवेश के मुख्य मार्ग से अन्नपूर्णा नगर कालोनी की सड़क नीची है। ढलान भी कालोनी की ओर है। जल निकासी का प्रवाह शिवपुरवा की ओर है। शिवपुरवा मार्ग पर खुदाई और सफाई ठीक ढंग से नहीं होने के कारण कालोनी का पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। नाला निर्माण पूरा हो जाने पर समस्या हल हो जाएगी।
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नगर निगम जलमग्न
वाराणसी। नगर निगम दूसरों के घरों से पानी क्या बाहर निकालेगा, उसके अपने परिसर में ही पानी भरा हुआ है। मिनी सदन, टेनिस कोर्ट, गुलाब बाग, शहीद उद्यान में पानी भर गया है। नगर निगम के बेसमेंट में भी ऐसी ही स्थिति है। ये हालात तब हैं जब नालों की सफाई के लिए निगम ने 70 लाख रुपये खर्च किए हैं। इसके बावजूद अभियंताओं के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं है। उनका दावा है कि सफाई नहीं हुई तो पानी निकला कैसे जबकि शहर के विभिन्न मुहल्लों में जलभराव को देखते हुए दोपहर में महापौर रामगोपाल मोहले ने जोनल अधिकारियों को क्षेत्र में भेजा।
मनमानी ने बिगाड़ी वर्षा जल निकासी की व्यवस्था
सीवर, ड्रेनेज पाइप लाइन की डिजाइन में नहीं बल्कि प्लानिंग में कमी है। शहर में जायका या अन्य एजेंसियों द्वारा सीवेज, ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने के जो भी काम किए जाते हैं, उनके इंजीनियर डिजाइन का परीक्षण कराने के लिए ले आते हैं। डिजाइन में जो कमियां होती हैं, उन्हें ठीक किया जाता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर वे उस डिजाइन को पूरी तरह अमल में नहीं लाते। अक्सर ऐसा होता है कि ठेकेदार तय मानक का ख्याल नहीं रखते। कहीं कहीं पानी के बहाव के लिए पाइप लाइन का जो स्लोप (ढलान) होना चाहिए वह ही नहीं होता। सीवर और बारिश के पानी के निकास की अलग-अलग पाइप लाइन होनी चाहिए। इन दोनों सिस्टम को आपस में जोड़े जाने से स्टॉर्म ड्रेन सिस्टम यानी वर्षा जल निकासी की व्यवस्था बिगड़ गई है। कार्यदायी संस्थाओं में आपसी तालमेल की कमी भी दिखती है। नई सीवर, ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाई तो गई है लेकिन जब तक एसटीपी नहीं बन जाता उसका लाभ नहीं मिल सकता। एसटीपी बनने के बाद इसके चालू होने पर निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
- डॉ. केके पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग, आईआईटी बीएचयू।
इलाज कराने तक नहीं पहुुंच पाए लोग
वाराणसी (ब्यूरो)। बारिश के बाद शहर में जगह-जगह जलजमाव के कारण बीमारों घर से निकलकर दुश्वारी उठाने के बजाय तकलीफ बर्दाश्त करना बेहतर समझा। इसके चलते कबीरचौरा स्थित शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल और पांडेयपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में अन्य दिनों की तुलना में शुक्रवार को मरीजों की संख्या कम रही। कबीरचौरा अस्पताल में गुरुवार को करीब 900 मरीज पहुंचे थे जबकि शुक्रवार को 598 ही पहुंचे। इसी तरह दीनदयाल अस्पताल में गुरुवार को 870 मरीज पहुंचे थे जबकि शुक्रवार को 430 मरीज ही पहुंचे। बीएचयू सिंहद्वार से लेकर अस्पताल के ओपीडी तक जलभराव के चलते मरीजों को खासी तकलीफ उठानी पड़ी।