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काशी में मंडन मिश्र के भवन का अधिग्रहण
Varanasi
Updated Mon, 06 Jan 2014 05:45 AM IST
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वाराणसी। वेद मीमांसा के प्रकांड विद्वान और आद्य शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले पंडित मंडन मिश्र के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित ऐतिहासिक भवन समेत तीन भवनों के अधिग्रहण के आदेश दिए गए हैं। मंदिर कार्यपालक समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त चंचल कुमार तिवारी ने मंदिर के विस्तार करने की योजना के तहत यह फैसला लिया है। फैसले के बाद विशेष भूमि आध्याप्ति अधिकारी को जरूरी दस्तावेज तैयार कर प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया गया है। दोपहर बाद तहसीलदार से इन भवनों की पैमाइश भी कराई गई।
विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुशील कुमार मौर्य ने तीन जनवरी को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को पत्र भेजकर मंडन मिश्र के भवन के अलावा दो अन्य भवनों के अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने के लिए कहा गया है। बता दें कि मंडन मिश्र के भवन को जीर्ण-शीर्ण बताते हुए नगर निगम ने जून 2011 में इसको गिराने के लिए टेंडर भी जारी कर दिया था। उस समय निगम प्रशासन को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में इस ऐतिहासिक भवन में मंडन मिश्र की प्रतिमा तो है ही, राधाकृष्ण का प्राचीन मंदिर भी है। बताते चलें कि पंडित मंडन मिश्र के हार जाने के बाद उनकी पत्नी ने आद्य शंकराचार्य से शास्त्रार्थ कर उन्हें हरा दिया था।
इनसेट---
वंशज ने दी आत्मदाह की धमकी
वाराणसी। मंडन मिश्र के वंशज केदारनाथ व्यास रविवार को भवन अधिग्रहण के आदेश की जानकारी मिलने पर उबल पड़े। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अधिग्रहण हुआ तो वह आत्मदाह कर लेंगे।
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व्यास ने अमर उजाला को बताया कि मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ने उनके भवन के संरक्षण का भरोसा दिलाया था। उनकी अनुमति से ही वे भवन की मरम्मत करा रहे हैं। अब तक मरम्मत पर पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस बीच अधिग्रहण संबंधी आदेश की जानकारी से उन्हें झटका लगा है।
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विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुशील कुमार मौर्य ने तीन जनवरी को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी को पत्र भेजकर मंडन मिश्र के भवन के अलावा दो अन्य भवनों के अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने के लिए कहा गया है। बता दें कि मंडन मिश्र के भवन को जीर्ण-शीर्ण बताते हुए नगर निगम ने जून 2011 में इसको गिराने के लिए टेंडर भी जारी कर दिया था। उस समय निगम प्रशासन को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में इस ऐतिहासिक भवन में मंडन मिश्र की प्रतिमा तो है ही, राधाकृष्ण का प्राचीन मंदिर भी है। बताते चलें कि पंडित मंडन मिश्र के हार जाने के बाद उनकी पत्नी ने आद्य शंकराचार्य से शास्त्रार्थ कर उन्हें हरा दिया था।
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वंशज ने दी आत्मदाह की धमकी
वाराणसी। मंडन मिश्र के वंशज केदारनाथ व्यास रविवार को भवन अधिग्रहण के आदेश की जानकारी मिलने पर उबल पड़े। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अधिग्रहण हुआ तो वह आत्मदाह कर लेंगे।
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व्यास ने अमर उजाला को बताया कि मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ने उनके भवन के संरक्षण का भरोसा दिलाया था। उनकी अनुमति से ही वे भवन की मरम्मत करा रहे हैं। अब तक मरम्मत पर पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस बीच अधिग्रहण संबंधी आदेश की जानकारी से उन्हें झटका लगा है।