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पाइन की जगह सेमल की लकड़ी से सजावट
Varanasi
Updated Thu, 26 Sep 2013 05:37 AM IST
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वाराणसी। अबकी दशहरे में दुर्गापूजा समितियां भी महंगाई की मार से परेशान हैं। पंडाल और प्रतिमा के निर्माण पर पिछले साल की तुलना में 25 से 30 फीसदी अधिक खर्च आने का अनुमान है, जबकि चंदा देने वालों की संख्या लगातार कम हो रही है। लागत कम करने के लिए समितियां कटौती के तरीके निकाल रही हैं। पहले पंडाल में कपड़ों की सजावट के लिए पाइन की लकड़ी इस्तेमाल की जाती थी। उसकी जगह अबकी सेमल की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा।
पूजा पंडालों में लकड़ी की पतली पट्टियों (चीरा लकड़ी) पर कील से कपड़े लगाए जाते हैं। इस काम के लिए कम वजन की लकड़ी की दरकार होती है ताकि पंडाल का भार ज्यादा न हो। इस काम में अब तक पाइन की लकड़ी इस्तेमाल की जाती थी। अबकी पाइन की लकड़ी की कीमत 1300 से 1400 रुपये घन फुट है। पंडाल में कम से कम दो सौ से ढाई सौ घन फुट लकड़ी की जरूरत पड़ती है। पाइन की लकड़ी का इस्तेमाल करने पर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक की लागत आएगी। इसकी काट के रूप में पूजा समितियों ने सेमल की लकड़ी खोजी है। सेमल की लकड़ी की कीमत 400 रुपये घनफुट है। इससे काम करने पर लागत एक लाख रुपये या उससे कम ही रहेगी। पंडाल सजाने के काम आने वाला कपड़ा पिछले साल 16-17 रुपये प्रति मीटर था लेकिन अबकी उसकी कीमत 26 रुपये हो गई है। पंडाल बनाने में दो हजार से 3500 मीटर तक कपड़ा लगता है। इस तरह समितियों को अबकी 20 से 35 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
चूड़ीदार बंदी (रस्सी) की कीमत एक साल में 4500 से बढ़कर 6000 रुपये क्विंटल हो गई है। एक पंडाल में पांच से 10 क्विंटल तक रस्सी लगती है। इस तरह रस्सी पर ही 10 से 15 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। पंडाल में दो से तीन क्विंटल कील खर्च होती है और कील की कीमत 40 से बढ़कर 52 रुपये किलो हो गई है। पिछले साल बांस 150 रुपये में मिल जाता था लेकिन अबकी बार उसकी कीमत 200 रुपये हो गई है। पंडालों में एक से तीन हजार तक बांस लगते हैं, जिस पर डेढ़ से साढ़े चार लाख लागत आती थी। अबकी बांस पर ही दो से छह लाख रुपये के बीच समितियों को खर्च करने पड़ेंगे। प्रतिमा निर्माण का खर्च भी बढ़ा है। मजदूरी भी पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। बाबा मछोदरानाथ पूजा समिति के राजेश यादव ने बताया कि अबकी 25 से 30 फीसदी ज्यादा लागत आने का अनुमान है। खर्च बढ़ता जा रहा है और स्वेच्छा से चंदा देने वालों की संख्या घटी है। इस वजह से शहर में 20 से ज्यादा समितियां पूजा पंडाल सजाने की व्यवस्था नहीं कर पा रही हैं।
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कोलकाता का तारा मंदिर दिखेगा मछोदरी पार्क में
मछोदरानाथ पूजा पंडाल को कोलकाता के प्रसिद्ध मां तारा मंदिर के प्रतिरूप में तैयार किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के कारीगरों का दल पिछले 15 दिनों से इसे तैयार करने में लगा है। प्रतिमा निर्माण का काम भी शुरू हो गया है। कोलकाता के केना पाल के नेतृत्व में कारीगर प्रतिमा गढ़ने में लगे हैं।
मछोदरी पार्क में बाबा मछोदरानाथ पूजा समिति के पंडाल का ढांचा तैयार हो गया है। कुल 2500 और 200 बल्लियों के सहारे कारीगर कोलकाता के मां तारा मंदिर का प्रतिरूप तैयार कर रहे हैं। कोलकाता के 16 प्रमुख कारीगर और इतने ही श्रमिक पिछले एक पखवाड़े से रातदिन काम कर रहे हैं। आसमान में बादल होने के कारण पंडाल में कपड़ों की सजावट का काम फिलहाल रोक दिया गया है। यह काम दो-तीन दिनों बाद शुरू किया जाएगा। पंडाल चतुर्थी-पंचमी तक पूरी तरह तैयार कर लेना है। समिति के राजेश यादव ने बताया कि संगीत के कार्यक्रम के लिए पार्क के दूसरे हिस्से में मंच तैयार किया जा रहा है। प्रतिमा का निर्माण दो दिन पूर्व शुरू हुआ। अबकी प्रतिमा का स्वरूप भी अलग किस्म का होगा। बिजली की सजावट का काम पूजा से तीन-चार दिन पहले किया जाएगा। पंडाल का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक होगा ताकि प्रवेश करने वाले का मन श्रद्धा से भर जाए।
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पूजा पंडालों में लकड़ी की पतली पट्टियों (चीरा लकड़ी) पर कील से कपड़े लगाए जाते हैं। इस काम के लिए कम वजन की लकड़ी की दरकार होती है ताकि पंडाल का भार ज्यादा न हो। इस काम में अब तक पाइन की लकड़ी इस्तेमाल की जाती थी। अबकी पाइन की लकड़ी की कीमत 1300 से 1400 रुपये घन फुट है। पंडाल में कम से कम दो सौ से ढाई सौ घन फुट लकड़ी की जरूरत पड़ती है। पाइन की लकड़ी का इस्तेमाल करने पर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक की लागत आएगी। इसकी काट के रूप में पूजा समितियों ने सेमल की लकड़ी खोजी है। सेमल की लकड़ी की कीमत 400 रुपये घनफुट है। इससे काम करने पर लागत एक लाख रुपये या उससे कम ही रहेगी। पंडाल सजाने के काम आने वाला कपड़ा पिछले साल 16-17 रुपये प्रति मीटर था लेकिन अबकी उसकी कीमत 26 रुपये हो गई है। पंडाल बनाने में दो हजार से 3500 मीटर तक कपड़ा लगता है। इस तरह समितियों को अबकी 20 से 35 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
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चूड़ीदार बंदी (रस्सी) की कीमत एक साल में 4500 से बढ़कर 6000 रुपये क्विंटल हो गई है। एक पंडाल में पांच से 10 क्विंटल तक रस्सी लगती है। इस तरह रस्सी पर ही 10 से 15 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। पंडाल में दो से तीन क्विंटल कील खर्च होती है और कील की कीमत 40 से बढ़कर 52 रुपये किलो हो गई है। पिछले साल बांस 150 रुपये में मिल जाता था लेकिन अबकी बार उसकी कीमत 200 रुपये हो गई है। पंडालों में एक से तीन हजार तक बांस लगते हैं, जिस पर डेढ़ से साढ़े चार लाख लागत आती थी। अबकी बांस पर ही दो से छह लाख रुपये के बीच समितियों को खर्च करने पड़ेंगे। प्रतिमा निर्माण का खर्च भी बढ़ा है। मजदूरी भी पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। बाबा मछोदरानाथ पूजा समिति के राजेश यादव ने बताया कि अबकी 25 से 30 फीसदी ज्यादा लागत आने का अनुमान है। खर्च बढ़ता जा रहा है और स्वेच्छा से चंदा देने वालों की संख्या घटी है। इस वजह से शहर में 20 से ज्यादा समितियां पूजा पंडाल सजाने की व्यवस्था नहीं कर पा रही हैं।
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कोलकाता का तारा मंदिर दिखेगा मछोदरी पार्क में
मछोदरानाथ पूजा पंडाल को कोलकाता के प्रसिद्ध मां तारा मंदिर के प्रतिरूप में तैयार किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के कारीगरों का दल पिछले 15 दिनों से इसे तैयार करने में लगा है। प्रतिमा निर्माण का काम भी शुरू हो गया है। कोलकाता के केना पाल के नेतृत्व में कारीगर प्रतिमा गढ़ने में लगे हैं।
मछोदरी पार्क में बाबा मछोदरानाथ पूजा समिति के पंडाल का ढांचा तैयार हो गया है। कुल 2500 और 200 बल्लियों के सहारे कारीगर कोलकाता के मां तारा मंदिर का प्रतिरूप तैयार कर रहे हैं। कोलकाता के 16 प्रमुख कारीगर और इतने ही श्रमिक पिछले एक पखवाड़े से रातदिन काम कर रहे हैं। आसमान में बादल होने के कारण पंडाल में कपड़ों की सजावट का काम फिलहाल रोक दिया गया है। यह काम दो-तीन दिनों बाद शुरू किया जाएगा। पंडाल चतुर्थी-पंचमी तक पूरी तरह तैयार कर लेना है। समिति के राजेश यादव ने बताया कि संगीत के कार्यक्रम के लिए पार्क के दूसरे हिस्से में मंच तैयार किया जा रहा है। प्रतिमा का निर्माण दो दिन पूर्व शुरू हुआ। अबकी प्रतिमा का स्वरूप भी अलग किस्म का होगा। बिजली की सजावट का काम पूजा से तीन-चार दिन पहले किया जाएगा। पंडाल का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक होगा ताकि प्रवेश करने वाले का मन श्रद्धा से भर जाए।