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आंबेडकर ने दिया सामाजिक समरसता का संदेश
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वाराणसी। डीएवीपीजी कॉलेज के इतिहास विभाग में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि शिवाजी विश्वविद्यालय मुंबई के प्रोफेसर जगत कराडे ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। उन्होंने उस समय समरसता की बात की जब जातीय संघर्ष चरम पर था।
‘डॉ. भीमराव आंबेडकर का सामाजिक दर्शन‘ विषयक संगोष्ठी के समापन समारोह में प्रो. कराडे ने कहा कि बाबा साहब के पास भारत के विकास का समूचा ब्लूप्रिंट तैयार था। उनकी एक ही सोच थी कि सभी भारतीय एकजुट हों और इसके लिए उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया था। विशिष्ट अतिथि आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. उपेंद्र चौधरी ने कहा कि बाबा साहेब की विदेश नीति अद्भुत थी और उनके विचार विदेश नीति को लेकर देश को काफी लाभ पहुंचा सकते हैं। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू समाज विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि आंबेडकर का मानना था कि जो धर्म मनुष्य को मानवता की ओर ले जाये वही धर्म है अन्यथा धर्म का कोई औचित्य नहीं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. शोभनाथ पाठक, स्वागत डॉ. प्रतिभा मिश्रा, संचालन डॉ. शिवनारायण और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने किया।
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‘डॉ. भीमराव आंबेडकर का सामाजिक दर्शन‘ विषयक संगोष्ठी के समापन समारोह में प्रो. कराडे ने कहा कि बाबा साहब के पास भारत के विकास का समूचा ब्लूप्रिंट तैयार था। उनकी एक ही सोच थी कि सभी भारतीय एकजुट हों और इसके लिए उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया था। विशिष्ट अतिथि आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. उपेंद्र चौधरी ने कहा कि बाबा साहेब की विदेश नीति अद्भुत थी और उनके विचार विदेश नीति को लेकर देश को काफी लाभ पहुंचा सकते हैं। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू समाज विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने कहा कि आंबेडकर का मानना था कि जो धर्म मनुष्य को मानवता की ओर ले जाये वही धर्म है अन्यथा धर्म का कोई औचित्य नहीं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. शोभनाथ पाठक, स्वागत डॉ. प्रतिभा मिश्रा, संचालन डॉ. शिवनारायण और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने किया।
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