{"_id":"5c82d458bdec2214254458f3","slug":"91552077912-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पं. उदय का ध्रुपद और पं. देव ज्योति का सरोद होगा झंकृत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पं. उदय का ध्रुपद और पं. देव ज्योति का सरोद होगा झंकृत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। प्राचीन संगीत की बैठक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लीजेंड्स आफ इंडिया की ओर से काशी में बैठक का आयोजन किया है। शनिवार को नगवां स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल के एंफीथिएटर में आयोजित बैठक में काशी के कलाकारों के साथ ही सुधि श्रोता भी पहुंचेंगे। इसमें ध्रुपद गायन के साथ सरोद वादन की युगलबंदी संगीत के रसिकों को लुभाएगी।
ध्रुपद गायक पं. उदय भावलकर और सरोद वादक पं. देवज्योति बोस के साथ संगत कलाकार तबलावादक रोहन बोस व पखावज पर सुखद मुंडे भी प्रस्तुति देंगे। संस्था के दीपायन मजूमदार ने बताया कि हम लोग बहुत दिनों से काशी में कार्यक्रम करने के लिए प्रयासरत थे। अब जाकर मौका मिला है। बैठक की शृंखला के तहत काशी में यह आयोजन किया जा रहा है। कला प्रकाश और अमर उजाला के सहयोग से संगीत की बैठक परंपरा से संगीत के सुधिजनों को रूबरू होने का मौका मिलेगा। सभी के लिए प्रवेश निशुल्क है।
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के सितारे पं. उदय भावलकर कम उम्र से ही गायन प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। देश और विदेश के विभिन्न समारोहों के अलावा वह बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी अपनी संगीत की प्रतिभा दिखा चुके हैं। बतौर अध्यापक वह विश्व के कई संगीत विश्वविद्यालय में शिष्यों को ध्रुपद की शिक्षा देते रहते हैं। कोलकाता में जन्मे सरोद वादक पं. देव ज्योति बोस ने संगीत की शिक्षा बहुत कम उम्र से ही शुरू कर दी थी। उस्ताद अमजद अली खां के शिष्यों में शुमार पं. बोस ने अपने सरोद की ख्याति देश-विदेश तक फैलाई है। उन्होंने पं. राजन-साजन मिश्र से भी संगीत का निर्देशन लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ध्रुपद गायक पं. उदय भावलकर और सरोद वादक पं. देवज्योति बोस के साथ संगत कलाकार तबलावादक रोहन बोस व पखावज पर सुखद मुंडे भी प्रस्तुति देंगे। संस्था के दीपायन मजूमदार ने बताया कि हम लोग बहुत दिनों से काशी में कार्यक्रम करने के लिए प्रयासरत थे। अब जाकर मौका मिला है। बैठक की शृंखला के तहत काशी में यह आयोजन किया जा रहा है। कला प्रकाश और अमर उजाला के सहयोग से संगीत की बैठक परंपरा से संगीत के सुधिजनों को रूबरू होने का मौका मिलेगा। सभी के लिए प्रवेश निशुल्क है।
विज्ञापन
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के सितारे पं. उदय भावलकर कम उम्र से ही गायन प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। देश और विदेश के विभिन्न समारोहों के अलावा वह बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी अपनी संगीत की प्रतिभा दिखा चुके हैं। बतौर अध्यापक वह विश्व के कई संगीत विश्वविद्यालय में शिष्यों को ध्रुपद की शिक्षा देते रहते हैं। कोलकाता में जन्मे सरोद वादक पं. देव ज्योति बोस ने संगीत की शिक्षा बहुत कम उम्र से ही शुरू कर दी थी। उस्ताद अमजद अली खां के शिष्यों में शुमार पं. बोस ने अपने सरोद की ख्याति देश-विदेश तक फैलाई है। उन्होंने पं. राजन-साजन मिश्र से भी संगीत का निर्देशन लिया है।
विज्ञापन