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खुद अनपढ़ होते हुए मुन्नी बीबी ने बच्चों को बना दिया अधिकारी
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वाराणसी। हमारे बीच ऐसी कई महिलाएं हैं जो आदर्श मां हैं। उन्होंने अपने बच्चों का बेहतर ढंग से पालन पोषण करने के साथ ही उन्हें अच्छी शिक्षा दी, जिसकी चलते उनके उनके बच्चे अच्छे मुकाम पर हैं।
गोल घर स्थित पक्की बाजार निवासी मुन्नी बीबी की कहानी एक जलते दीये की लौ की तरह है, जो खुद को जलाकर अपने बच्चों की जिंदगी से अंधकार मिटाती है। मुन्नी बीबी भी एक ऐसी मां हैं, जिन्होंने निरक्षर होते हुए भी शिक्षा से अपने बच्चों की किस्मत लिख डाली। छोटी उम्र शादी, गरीबी, अशिक्षा के साथ पति का साथ छुटने का दंश झलने वाली मुन्नी ने पढ़ाई का महत्व समझा। अपने चार पुत्रों और चार पुत्रियों को उच्च शिक्षा दिलाई। आज मुन्नी का एक बेटा महोबा में जिला जज है तो दूसरा बेटा रेलवे मेडिकल आफिसर, एक बेटा और बेटी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं तो एक बेटा बनारस में कानूनी सलाहकार है। वहीं इन्होंने एक बेसहारा और अनाथ बच्चे की भी जिंदगी सवार कर उसे पैरों पर खड़ा कर दिया है।
मां के हौसले को सलाम
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘एक कदम और’ संस्था की ओर से नब्बे वर्षीय इस मां के हिम्मत और हौसले को सलाम करते हुए सम्मानित किया गया। संस्था की संस्थापिका शबाना आफताब का कहना था कि मुन्नी बीबी ने समाज के तानों की परवाह किए बगैर संघर्ष करती रहीं। सम्मान समारोह में अर्चना त्रिपाठी, मंजुला अस्थाना, समृद्धि अस्थाना, निशा, शमा, हिना, महक आदि मौजूद रहीं।
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गोल घर स्थित पक्की बाजार निवासी मुन्नी बीबी की कहानी एक जलते दीये की लौ की तरह है, जो खुद को जलाकर अपने बच्चों की जिंदगी से अंधकार मिटाती है। मुन्नी बीबी भी एक ऐसी मां हैं, जिन्होंने निरक्षर होते हुए भी शिक्षा से अपने बच्चों की किस्मत लिख डाली। छोटी उम्र शादी, गरीबी, अशिक्षा के साथ पति का साथ छुटने का दंश झलने वाली मुन्नी ने पढ़ाई का महत्व समझा। अपने चार पुत्रों और चार पुत्रियों को उच्च शिक्षा दिलाई। आज मुन्नी का एक बेटा महोबा में जिला जज है तो दूसरा बेटा रेलवे मेडिकल आफिसर, एक बेटा और बेटी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं तो एक बेटा बनारस में कानूनी सलाहकार है। वहीं इन्होंने एक बेसहारा और अनाथ बच्चे की भी जिंदगी सवार कर उसे पैरों पर खड़ा कर दिया है।
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मां के हौसले को सलाम
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘एक कदम और’ संस्था की ओर से नब्बे वर्षीय इस मां के हिम्मत और हौसले को सलाम करते हुए सम्मानित किया गया। संस्था की संस्थापिका शबाना आफताब का कहना था कि मुन्नी बीबी ने समाज के तानों की परवाह किए बगैर संघर्ष करती रहीं। सम्मान समारोह में अर्चना त्रिपाठी, मंजुला अस्थाना, समृद्धि अस्थाना, निशा, शमा, हिना, महक आदि मौजूद रहीं।
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