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मुझको बिगड़े हुए हालात से डर लगता है----

Thu, 20 Sep 2018 02:24 AM IST
Updated Thu, 20 Sep 2018 02:24 AM IST
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मुझको बिगड़े हुए हालात से डर लगता है----
वाराणसी। बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र में बुधवार को आयोजित भोजपुरी युवा कवि संगम में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से कई सामाजिक समस्याओं, विषमताओं की चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि गीतकार ओमधीरज ने कहा कि भोजपुरी वाचिक परंपरा है। इसलिए कविता लिखी जानी के बाद अगर उसे सही ढंग से न पढ़ा जाए तो कविता का वह भाव ठीक ठीक नहीं आ सकता।
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अध्ययन केंद्र के राहुल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वंदना यादव ने मुझको बिगड़े हुए हालात से डर लगता है शीर्षक पर आधारित कविता से देश में घटित होने वाली घटनाओं, राजनीतिक परिदृश्य की चर्चा की। रामवचन यादव ने का करबे पढ़ाई पिया, सुशांत शर्मा ने गांव के जिनगी और राणा अवधूत ने आज का महाभारत शीर्षक पर कविता पाठ किया। सुशांत शर्मा द्वारा असमान दरार परे त परे, खेतवा में दरार परे ना कविता को खूब सराहा गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे कवि प्रकाश उदय ने कहा कि यह जो हवा पानी जानलेवा होती जा रही है,इसकी शिनाख्त भोजपुरी कविता की नई पीढ़ी कर रही है। अध्यक्षता करते हुए केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि भोजपुरी कविता व्यंग्य व विनोद से आगे बढ़कर विचार व बदलाव की कविता है। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र उदय पाल, स्वागत डॉली मेघनानी, धन्यवाद ज्ञापन दिवाकर तिवारी ने किया। इस दौरान शिक्षक और शोध छात्र मौजूद रहे।
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