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बच्चों और किशोरों की बीएचयू में अलग से ओपीडी
Updated Sat, 21 Apr 2018 01:56 AM IST
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वाराणसी। रिलेशन की कड़वाहट हो या बेहतर कॅरियर की छटपटाहट, किसी बीमारी का दर्द हो या कोई मानसिक उलझन...। बच्चों, किशोरों और नौजवानों की इन सभी परेशानियों का निदान अब एक ही छत के नीचे किया जा रहा है। यह पहल बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में शुरू हो गई है। यहां प्रदेश का पहला ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलेसेंट हेल्थ’ खोला गया है। आम तौर पर किशोर और युवा अपनी परेशानी साझा करने से झिझकते हैं। इसे देखते हुए ही इस सेंटर के तहत बीएचयू अस्पताल में ‘एडोलेसेंट क्लिनिक’ की शुरुआत की गई है।
सर सुंदरलाल अस्पताल के 117 नंबर कमरे में प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलेसेंट हेल्थ स्थापित किया गया है। दस से 24 साल के बच्चे, किशोर और युवाओं के लिए नेशनल हेल्थ मिशन और ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड नई दिल्ली की पहल पर शुरू किए गए इस क्लिनिक में अलग-अलग 13 विशेषज्ञों की ओपीडी चलती है। इसमें मेडिसिन से लेकर स्त्री रोग, त्वचा, नेत्र, नाक, कान व गला, बाल रोग के साथ ही मनोचिकित्सा विभाग के कंसल्टेंट की अलग-अलग ओपीडी निर्धारित है। इसकी नोडल अफसर स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉ. मधु जैन हैं।
कंसल्टेंट डॉ. जय सिंह यादव बताते हैं कि ये ओपीडी खास तौर से दस से 24 साल के लोगों के लिए हैं। किशोरावस्था ऐसी अवस्था है, जब उस उम्र के मरीज अपनी शारीरिक, मानसिक परेशानियों को हर किसी से साझा नहीं कर पाते। बताया कि फरवरी से लेकर अब तक तीन महीने में 60 केस आ चुके हैं। इसमें किशोरों-युवाओं की सबसे ज्यादा समस्या अफेयर, ब्रेकअप, घर व बाहर के रिलेशनशिप से होने वाले अवसाद को लेकर है। इसके बाद कॅरियर उनकी बड़ी समस्या है। यहां बतौर काउंसलर अरुण और कल्याणी ऐसे मामलों की काउंसिलिंग कर रहे हैं।
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सर सुंदरलाल अस्पताल के 117 नंबर कमरे में प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलेसेंट हेल्थ स्थापित किया गया है। दस से 24 साल के बच्चे, किशोर और युवाओं के लिए नेशनल हेल्थ मिशन और ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड नई दिल्ली की पहल पर शुरू किए गए इस क्लिनिक में अलग-अलग 13 विशेषज्ञों की ओपीडी चलती है। इसमें मेडिसिन से लेकर स्त्री रोग, त्वचा, नेत्र, नाक, कान व गला, बाल रोग के साथ ही मनोचिकित्सा विभाग के कंसल्टेंट की अलग-अलग ओपीडी निर्धारित है। इसकी नोडल अफसर स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉ. मधु जैन हैं।
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कंसल्टेंट डॉ. जय सिंह यादव बताते हैं कि ये ओपीडी खास तौर से दस से 24 साल के लोगों के लिए हैं। किशोरावस्था ऐसी अवस्था है, जब उस उम्र के मरीज अपनी शारीरिक, मानसिक परेशानियों को हर किसी से साझा नहीं कर पाते। बताया कि फरवरी से लेकर अब तक तीन महीने में 60 केस आ चुके हैं। इसमें किशोरों-युवाओं की सबसे ज्यादा समस्या अफेयर, ब्रेकअप, घर व बाहर के रिलेशनशिप से होने वाले अवसाद को लेकर है। इसके बाद कॅरियर उनकी बड़ी समस्या है। यहां बतौर काउंसलर अरुण और कल्याणी ऐसे मामलों की काउंसिलिंग कर रहे हैं।
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