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स्टेशन निदेशक को लेकर दो दिन चला हाई प्रोफाइल ड्रामा
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। कैंट स्टेशन पर एक आईआरटीएस अधिकारी को सुबह स्टेशन निदेशक पद का चार्ज दिया गया और कुछ ही घंटे बाद मना कर दिया गया। इसको लेकर जब नाराज आईआरटीएस लॉबी ने दबाव बनाया तो आनन-फानन दूसरे दिन उन्हें फिर से ज्वाइन कराया गया।
महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की तैनाती में रेलवे की बदइंतजामी और मनमानी देखने को मिल रही है। रेलवे बोर्ड ने देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन डायरेक्टर नियुक्त किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्री सुविधा, परिचालन और विकास कार्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। कैंट रेलवे स्टेशन पर यह जिम्मेदारी एके पांडेय संभाल रहे थे। लगभग एक पखवारे से उनके तबादले और एक आईआरटीएस अधिकारी को यह जिम्मेदरी दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर रहीं। लगभग एक सप्ताह पूर्व आनंद मोहन सिंह का नाम स्पष्ट होते ही कयासों पर विराम लग गया। मंगलवार को आनंद मोहन ने स्टेशन निदेशक का चार्ज ले भी लिया और उन्होंने कुछ घंटे तक कार्यालय में काम काज भी देखा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो कुछ देर में दिल्ली से फोन घनघनाने लगे और आनंद मोहन को चार्ज न देने का फरमान जारी कर दिया गया।
जब रेलवे बोर्ड और बड़ौदा हाउस में बैठे अधिकारियों को पता चला कि चार्ज तो दे दिया गया है तो उन्होंने इसे वापस लेने को कहा और एके पांडेय को ही निदेशक पद की जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दे दिए गए। इधर, आईआरटीएस अधिकारी को बुलाने और बाद में फैसले को वापस लेने की चर्चा यहां से दिल्ली तक शुरू हो गई। आईआरटीएस लॉबी में भी इसको लेकर जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली। बुधवार को पूरे दिन दिल्ली में मंथन चलता रहा और लखनऊ, बनारस से फीडबैक लिए जाते रहे। देर शाम पांच बजे एक बार फिर से फैसला बदला और आनंद मोहन सिंह को शाम पांच बजे स्टेशन निदेशक का चार्ज दे दिया गया। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया की बुधवार को उनको चार्ज दे दिया गया है।
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महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की तैनाती में रेलवे की बदइंतजामी और मनमानी देखने को मिल रही है। रेलवे बोर्ड ने देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन डायरेक्टर नियुक्त किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्री सुविधा, परिचालन और विकास कार्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। कैंट रेलवे स्टेशन पर यह जिम्मेदारी एके पांडेय संभाल रहे थे। लगभग एक पखवारे से उनके तबादले और एक आईआरटीएस अधिकारी को यह जिम्मेदरी दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर रहीं। लगभग एक सप्ताह पूर्व आनंद मोहन सिंह का नाम स्पष्ट होते ही कयासों पर विराम लग गया। मंगलवार को आनंद मोहन ने स्टेशन निदेशक का चार्ज ले भी लिया और उन्होंने कुछ घंटे तक कार्यालय में काम काज भी देखा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो कुछ देर में दिल्ली से फोन घनघनाने लगे और आनंद मोहन को चार्ज न देने का फरमान जारी कर दिया गया।
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जब रेलवे बोर्ड और बड़ौदा हाउस में बैठे अधिकारियों को पता चला कि चार्ज तो दे दिया गया है तो उन्होंने इसे वापस लेने को कहा और एके पांडेय को ही निदेशक पद की जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दे दिए गए। इधर, आईआरटीएस अधिकारी को बुलाने और बाद में फैसले को वापस लेने की चर्चा यहां से दिल्ली तक शुरू हो गई। आईआरटीएस लॉबी में भी इसको लेकर जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली। बुधवार को पूरे दिन दिल्ली में मंथन चलता रहा और लखनऊ, बनारस से फीडबैक लिए जाते रहे। देर शाम पांच बजे एक बार फिर से फैसला बदला और आनंद मोहन सिंह को शाम पांच बजे स्टेशन निदेशक का चार्ज दे दिया गया। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया की बुधवार को उनको चार्ज दे दिया गया है।
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