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कालाबाजारी में निजामपुर का कोटा निरस्त
Updated Fri, 06 Apr 2018 01:08 AM IST
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ज्ञानपुर। भ्रष्टाचार और खाद्यान्न की कालाबाजारी के आरोप में गुरुवार को जिला आपूर्ति अधिकारी ने औराई क्षेत्र के निजामपुर के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का कोटा निरस्त कर दिया। इस मामले में एक महीने पहले कोटा निलंबित कर कोटेदार के खिलाफ औराई थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस कार्रवाई से कोटेदारों में खलबली मच गई है।
करीब एक महीने पहले निजामपुर के कोटेदार के खिलाफ ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय निरीक्षक दिनेश यादव ने जांच की तो अनियमिता और कालाबाजारी का मामला पकड़ में आया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने कोटे निलंबित करते हुए कोटेदार के खिलाफ का मुकदमा भी दर्ज कराया था। अब इस मामले में गुरुवार को कोटा निरस्त कर दिया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। कोटेदारों की मनमानी और अनियमितता से समुचित रूप से खाद्यान्न का वितरण नहीं हो रहा। जिले में कुल 735 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। अनियमिता मिलने पर इनमें 16 के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं जबकि 12 दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं। जिले के करीब 50 फीसदी कोटेदारों के खिलाफ गड़बड़ी करने की शिकायतें हैं लेकिन कार्रवाई कुछ ही कोटेदारों के खिलाफ हुई है। यही नहीं, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अब तक आठ गांवों के कार्डधारकों का सत्यापन भी नहीं हो पाया है।
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करीब एक महीने पहले निजामपुर के कोटेदार के खिलाफ ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय निरीक्षक दिनेश यादव ने जांच की तो अनियमिता और कालाबाजारी का मामला पकड़ में आया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने कोटे निलंबित करते हुए कोटेदार के खिलाफ का मुकदमा भी दर्ज कराया था। अब इस मामले में गुरुवार को कोटा निरस्त कर दिया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। कोटेदारों की मनमानी और अनियमितता से समुचित रूप से खाद्यान्न का वितरण नहीं हो रहा। जिले में कुल 735 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। अनियमिता मिलने पर इनमें 16 के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं जबकि 12 दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं। जिले के करीब 50 फीसदी कोटेदारों के खिलाफ गड़बड़ी करने की शिकायतें हैं लेकिन कार्रवाई कुछ ही कोटेदारों के खिलाफ हुई है। यही नहीं, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से अब तक आठ गांवों के कार्डधारकों का सत्यापन भी नहीं हो पाया है।
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