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गंगा दर्शन के लिए 166 भवनों का ड्रोन सर्वे
Updated Fri, 16 Feb 2018 02:20 AM IST
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वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार तक गंगा का जल सीधे पहुंचे और वहीं से गंगा दर्शन हो सके, इसके लिए वीडीए ने मंदिर से गंगा घाट के दायरे में आने वाले 166 भवनों का ड्रोन सर्वे कराया है। इस योजना पर 480 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके जरिए हरिद्वार में हर की पैड़ी की तरह काशी में भी गंगा दर्शन की तैयारी है। उधर, योजना का विरोध कर रहे नागरिक इस योजना को व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ काशी का मौलिक स्वरूप प्रभावित होगा बल्कि स्थानीय नागरिकों के साथ ही शहर के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो जाएंगी।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगाघाट के बीच की दूरी 450 मीटर है। इसके दायरे में आने वाले भवनों को चिह्नित करने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने बुधवार से ड्रोन सर्वे शुरू कराया है। गुरुवार को भी सर्वे का सिलसिला चला। दायरे में चिह्नित 166 भवनों में 26 मंदिर भी आ रहे हैं। भवनों के अलावा इन मंदिरों को शिफ्ट करना वीडीए और जिला प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। वीडीए का कहना है कि सर्वे कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही, यहां आने वाली अड़चनों से भी अवगत कराया जाएगा। इसके बाद वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। उधर, सर्वे से नाराज स्थानीय लोगों ने विरोध तेज कर दिया है। महाशिवरात्रि पर इन्होंने घरों पर काले झंडे लगाए थे। जिन 166 भवनों को चिह्नित किया गया है, उनके भवन स्वामियों को विस्थापन का भय सता रहा है। वहीं, कई जानकार भी काशी के मौलिक स्वरूप के प्रभावित होने की आशंका जताते हुए योजना पर सवाल उठा रहे हैं।
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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगाघाट के बीच की दूरी 450 मीटर है। इसके दायरे में आने वाले भवनों को चिह्नित करने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने बुधवार से ड्रोन सर्वे शुरू कराया है। गुरुवार को भी सर्वे का सिलसिला चला। दायरे में चिह्नित 166 भवनों में 26 मंदिर भी आ रहे हैं। भवनों के अलावा इन मंदिरों को शिफ्ट करना वीडीए और जिला प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। वीडीए का कहना है कि सर्वे कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही, यहां आने वाली अड़चनों से भी अवगत कराया जाएगा। इसके बाद वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। उधर, सर्वे से नाराज स्थानीय लोगों ने विरोध तेज कर दिया है। महाशिवरात्रि पर इन्होंने घरों पर काले झंडे लगाए थे। जिन 166 भवनों को चिह्नित किया गया है, उनके भवन स्वामियों को विस्थापन का भय सता रहा है। वहीं, कई जानकार भी काशी के मौलिक स्वरूप के प्रभावित होने की आशंका जताते हुए योजना पर सवाल उठा रहे हैं।
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