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मणिकर्णिकाघाट से लक्ष्मीबाई की शुरू होती है संघर्षगाथा
Updated Sat, 18 Nov 2017 02:02 AM IST
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वाराणसी। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की संघर्ष गाथा उनके जन्म स्थान मणिकर्णिका से ही प्रारंभ होती है। आज भी उनके जन्मस्थान और तिथि के सवाल पर कालगणना और परंपरा की प्रमाणिकता को नकारते हुए गलत संदर्भों पर लोग जोर दे रहे हैं। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का अपमान है। शुक्रवार को संस्कृति भारती की ओर से आर्य महिला पीजी कालेज में आयोजित ‘रानी लक्ष्मीबाई की संघर्ष गाथा: मणिकर्णिका से फूल बाग तक’ विषय संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।
मुख्य अतिथि पूर्व डीआईजी आरके शुक्ल ने कहाकि लक्ष्मीबाई मेरे लिए प्रेरणा रहीं। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं से आह्वान किया कि वे शोध कर उनके विभिन्न पहलुओं को सामने लाने की जरूरत है। विशिष्ठ अतिथि प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि राजनीतिक क्षितिज पर स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों की उपेक्षा का परिणाम है कि रानी लक्ष्मीबाई के जन्मस्थान ओर तिथि पर विसंगति है। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू समाजशास्त्र विभाग के प्रो. अरविंद जोशी ने कहा कि लक्ष्मीबाई ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। भारतीय समाज उनका सदैव ऋणी रहेगा। संस्कार भारती के संयोजक उपेंद्र विनायक सहस्रबुद्धे ने धन्यवाद दिया। संचालन डॉ. अनीता सिंह ने किया। इस मौके पर शिवानंद सिंह, अभय बर्मन, बीडी गुजराती, आनंद प्रकाश मोजूद रहे। वहीं दूसरी ओर काशी नागरिक समाज की ओर से मैदागिन स्थित जैन मंदिर में जयंती मनाई गई। इस मौके पर राजेंद्र गुप्त, डॉ. मो. आरिफ खान, डॉ. अपूर्व नारायण तिवारी मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि पूर्व डीआईजी आरके शुक्ल ने कहाकि लक्ष्मीबाई मेरे लिए प्रेरणा रहीं। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं से आह्वान किया कि वे शोध कर उनके विभिन्न पहलुओं को सामने लाने की जरूरत है। विशिष्ठ अतिथि प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि राजनीतिक क्षितिज पर स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों की उपेक्षा का परिणाम है कि रानी लक्ष्मीबाई के जन्मस्थान ओर तिथि पर विसंगति है। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू समाजशास्त्र विभाग के प्रो. अरविंद जोशी ने कहा कि लक्ष्मीबाई ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। भारतीय समाज उनका सदैव ऋणी रहेगा। संस्कार भारती के संयोजक उपेंद्र विनायक सहस्रबुद्धे ने धन्यवाद दिया। संचालन डॉ. अनीता सिंह ने किया। इस मौके पर शिवानंद सिंह, अभय बर्मन, बीडी गुजराती, आनंद प्रकाश मोजूद रहे। वहीं दूसरी ओर काशी नागरिक समाज की ओर से मैदागिन स्थित जैन मंदिर में जयंती मनाई गई। इस मौके पर राजेंद्र गुप्त, डॉ. मो. आरिफ खान, डॉ. अपूर्व नारायण तिवारी मौजूद रहे।
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