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दिसंबर में काशी आएंगे धर्मगुरु दलाईलामा
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:46 AM IST
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सारनाथ। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय की ओर से दिसंबर में बड़े आयोजन की तैयारी है। तथागत की प्रथम उपदेशस्थली सारनाथ में दिसंबर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु परमपावन दलाईलामा आएंगे। वे यहां विश्व शांति के लिए विशेष पूजा-पाठ भी करेंगे। वे 30-31 दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मुख्य अतिथि का मान स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा गया है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि दलाईलामा 29 दिसंबर को सारनाथ पहुंचेंगे। यहां दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शिरकत करेंगे। सेमिनार का विषय ‘माइंड इन इंडियन फिलोसॉफिकल स्कूल्स ऑफ थाट एंड मॉर्डन साइंस’ रखा गया है। इस सेमिनार में अमेरिका, म्यांमार, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, थाईलैंड सहित कई देशों के प्रतिनिधि, बौद्ध दर्शन के विद्वान शामिल होंगे। इस अवसर पर बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा विश्वविद्यालय परिसर में ही विश्वशांति के लिए विशेष पूजा करेंगे। सेमिनार के मद्देनजर परिसर में रंग-रोगन कर उसे संवारने का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू व परमपावन दलाईलामा के संयुक्त प्रयास से वर्ष 1967 में स्थापित किया गया था।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि दलाईलामा 29 दिसंबर को सारनाथ पहुंचेंगे। यहां दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शिरकत करेंगे। सेमिनार का विषय ‘माइंड इन इंडियन फिलोसॉफिकल स्कूल्स ऑफ थाट एंड मॉर्डन साइंस’ रखा गया है। इस सेमिनार में अमेरिका, म्यांमार, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, थाईलैंड सहित कई देशों के प्रतिनिधि, बौद्ध दर्शन के विद्वान शामिल होंगे। इस अवसर पर बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा विश्वविद्यालय परिसर में ही विश्वशांति के लिए विशेष पूजा करेंगे। सेमिनार के मद्देनजर परिसर में रंग-रोगन कर उसे संवारने का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू व परमपावन दलाईलामा के संयुक्त प्रयास से वर्ष 1967 में स्थापित किया गया था।
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