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शहर के यातायात की बैसाखी बनेंगे दिव्यांग
Updated Wed, 31 Jan 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। शहर की ध्वस्त यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम अब दिव्यांग करेंगे। इसके तहत आगामी नौ फरवरी से लंका स्थित मालवीय चौराहा, गोदौलिया चौराहा, गिरजाघर चौराहा, सिगरा चौराहा और मैदागिन चौराहा पर चार-चार दिव्यांगों को ट्रैफिक ब्रिगेड के यूनिफार्म में सीटी और लाउड हेलर के साथ तैनात किया जाएगा। यह अनूठा प्रयोग करने वाले यातायात पुलिस के क्षेत्राधिकारी राकेश नायक का कहना है कि आगामी एक महीने में से इस मुहिम से दो सौ से ज्यादा दिव्यांगों को जोड़ कर पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया जाएगा।
शहर में जगह-जगह रोजाना सुबह से देर शात तक जाम लगा रहता है। इसके पीछे की ठोस वजह यह है कि चौराहों और तिराहों पर तैनात सिपाही मुस्तैदी से ड्यूटी करने की बजाय इधर-उधर के काम में व्यस्त रहते हैं। सीओ ट्रैफिक राकेश नायक ने बताया कि कानपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने दो सौ दिव्यांगोें की मदद से शहर की यातायात व्यवस्था को काफी हद तक पटरी पर ला दिया था। इसी अनुभव से उन्होंने सोचा कि क्यों न इसे बनारस में भी आजमाया जाए। कार्ययोजना तैयार कर अधिकारियों के सामने प्रस्तुत की और इसके बाद कानपुर के अपने दिव्यांग मित्रों से बातचीत की तो वो बनारस आने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। बताया कि कानपुर से आ रहे 20 दिव्यांग शहर के अन्य दिव्यांगों को पुलिस की मदद करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस काम के लिए गैर सरकारी संगठनों की मदद से प्रत्येक दिव्यांग को दो हजार रुपये महीना और भोजन के साथ ही रहने की सुविधा दी जाएगी।
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शहर में जगह-जगह रोजाना सुबह से देर शात तक जाम लगा रहता है। इसके पीछे की ठोस वजह यह है कि चौराहों और तिराहों पर तैनात सिपाही मुस्तैदी से ड्यूटी करने की बजाय इधर-उधर के काम में व्यस्त रहते हैं। सीओ ट्रैफिक राकेश नायक ने बताया कि कानपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने दो सौ दिव्यांगोें की मदद से शहर की यातायात व्यवस्था को काफी हद तक पटरी पर ला दिया था। इसी अनुभव से उन्होंने सोचा कि क्यों न इसे बनारस में भी आजमाया जाए। कार्ययोजना तैयार कर अधिकारियों के सामने प्रस्तुत की और इसके बाद कानपुर के अपने दिव्यांग मित्रों से बातचीत की तो वो बनारस आने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। बताया कि कानपुर से आ रहे 20 दिव्यांग शहर के अन्य दिव्यांगों को पुलिस की मदद करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस काम के लिए गैर सरकारी संगठनों की मदद से प्रत्येक दिव्यांग को दो हजार रुपये महीना और भोजन के साथ ही रहने की सुविधा दी जाएगी।
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