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कथक के शास्त्र से लेकर भंवई नृत्य के लोक तक की थिरकन
Updated Fri, 03 Nov 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। नटराज की नगरी में गंगा का किनारा गुरुवार की रात लोक और शास्त्र के भावों पर घुंघरुओं के बोल और तबले के नाद से गुंजायमान हुआ। कथक नृत्य की थिरकन पर लय-ताल के प्रवाह में लोग बहते रहे तो तेरह ताली, भंवई नृत्य और झूमर नृत्य के भाव हर किसी के तन -मन को छू गए। ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी की ठुमरी कजरी पर यूएसए के फ्यूजन बैंड ने चार चांद लगा दिया। नृत्य-गायन से सजी गंगा महोत्सव की तीसरी निशा अप्पा जी के नाम रही।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद राजेंद्र प्रसाद घाट के मुक्ताकाशीय भव्य मंच पर राजस्थानी मांड-केसरिया बालम पधारो म्हारो देस... की यादगार प्रस्तुति राघवेंद्र शर्मा ने पेश की तो घाट की सीढ़ियों से लेकर कुर्सियों तक बैठे संगीत प्रेमी झूम उठे। तबले पर सुधांशु शर्मा, बांसुरी पर विनीत शर्मा ने संगत की। इनके बाद गंगा देवी एवं समूह ने लयबद्ध थिरकन के साथ भावों, इशारों से एक नया लोक रच दिया। तेरह ताली की भाव पूर्ण प्रस्तुति के बाद पारंपरिक भंवई नृत्य और झूमर की बेजोड़ थिरकन पर लोग मुग्ध हुए। कमला देवी, मंजू देवी, रुक्मिणी, कुसुम समेत15 कलाकारों ने राजस्थानी लोक गीत के बोल पर यह नृत्य प्रस्तुति देकर अलग छाप छोड़ी। मंजीरा पर ईश्वर दास, ढोलक पर ओम प्रकाश, तानपूरा पर लक्ष्मण दास ने संगत की। इनके बाद यूएसए के फ्यूजन बैंड के साथ मंच पर आए इत्यादि श्रीवास्तव। इन्होंने पद्म विभूषण गिरिजा देवी की ठुमरी , कजरी पर फ्यूजन पेश किया। बंदिश के बोल थे-तेरी याद सताए सारी रात...। इसके बाद अप्पा जी के प्रिय दादरा- हमरी अंटरिया पे आजा रे संवरिया देखा देखी तनिक होई जाय रे...पर बैंड की प्रस्तुति से कलाकारों ने लोगों को मुग्ध किया। अंत में राग तिलक कामोद पर आधारित रागमाला पेश की गई। इनके बाद अनु सिन्हा ने अपनी शिष्याओं के साथ महाकवि जयशंकर प्रसाद की कामायनी पर मोहक कथक नृत्य पेश किया। कथक नृत्य में इड़ा की सेना से मनु का संघर्ष लयबद्ध हुआ तो लोग बरबस उन भावों के सम्मोहन में बसते गए। शुद्ध कथक नृत्य की पारंपरिक बंदिशों में उठान, आमद, तराना के साथ निकास की चालों, तिहाइयों से नृत्य नाटिका को पूर्णता प्रदान की गई। इनका साथ दिया सुनिष्का, भ्राव्या,सदानंद विश्वास, विजय बहादुर ने।
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दीप प्रज्ज्वलन के बाद राजेंद्र प्रसाद घाट के मुक्ताकाशीय भव्य मंच पर राजस्थानी मांड-केसरिया बालम पधारो म्हारो देस... की यादगार प्रस्तुति राघवेंद्र शर्मा ने पेश की तो घाट की सीढ़ियों से लेकर कुर्सियों तक बैठे संगीत प्रेमी झूम उठे। तबले पर सुधांशु शर्मा, बांसुरी पर विनीत शर्मा ने संगत की। इनके बाद गंगा देवी एवं समूह ने लयबद्ध थिरकन के साथ भावों, इशारों से एक नया लोक रच दिया। तेरह ताली की भाव पूर्ण प्रस्तुति के बाद पारंपरिक भंवई नृत्य और झूमर की बेजोड़ थिरकन पर लोग मुग्ध हुए। कमला देवी, मंजू देवी, रुक्मिणी, कुसुम समेत15 कलाकारों ने राजस्थानी लोक गीत के बोल पर यह नृत्य प्रस्तुति देकर अलग छाप छोड़ी। मंजीरा पर ईश्वर दास, ढोलक पर ओम प्रकाश, तानपूरा पर लक्ष्मण दास ने संगत की। इनके बाद यूएसए के फ्यूजन बैंड के साथ मंच पर आए इत्यादि श्रीवास्तव। इन्होंने पद्म विभूषण गिरिजा देवी की ठुमरी , कजरी पर फ्यूजन पेश किया। बंदिश के बोल थे-तेरी याद सताए सारी रात...। इसके बाद अप्पा जी के प्रिय दादरा- हमरी अंटरिया पे आजा रे संवरिया देखा देखी तनिक होई जाय रे...पर बैंड की प्रस्तुति से कलाकारों ने लोगों को मुग्ध किया। अंत में राग तिलक कामोद पर आधारित रागमाला पेश की गई। इनके बाद अनु सिन्हा ने अपनी शिष्याओं के साथ महाकवि जयशंकर प्रसाद की कामायनी पर मोहक कथक नृत्य पेश किया। कथक नृत्य में इड़ा की सेना से मनु का संघर्ष लयबद्ध हुआ तो लोग बरबस उन भावों के सम्मोहन में बसते गए। शुद्ध कथक नृत्य की पारंपरिक बंदिशों में उठान, आमद, तराना के साथ निकास की चालों, तिहाइयों से नृत्य नाटिका को पूर्णता प्रदान की गई। इनका साथ दिया सुनिष्का, भ्राव्या,सदानंद विश्वास, विजय बहादुर ने।
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