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देश की प्रगति के लिए नई खोज करें युवा
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:03 AM IST
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वाराणसी। आरबीआई के केंद्रीय निदेशक किरण कार्निक ने युवाओं से तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने नव प्रवर्तन की दिशा में बढ़ने पर जोर दिया। कहा कि देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए तकनीकी विकास के लिए नई खोज करने का गुरुतर दायित्व युवाओं को ही निभाना होगा। वे शनिवार को स्वतंत्रता भवन में आयोजित आईआईटी बीएचयू के छठे दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कार्निक ने कहा कि वर्तमान दौर में जिस तरह तकनीक के क्षेत्र में नई-नई खोज हो रही है। ऐसे में भावी इंजीनियरों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। एक इंजीनियर की सोच हमेशा तार्किक और समाज के लिए उपयोगी होनी चाहिए। 21वीं सदी में तकनीकी विकास के साथ-साथ नव प्रवर्तन से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।
दीक्षांत समारोह के मुख्य वक्ता शिक्षाविद और समाजसेवी सोमदेव त्यागी ने कहा कि आज के युवा बेहद क्षमतावान हैं। उनमें नेतृत्व-प्रतिनिधित्व करने की अद्भुत क्षमता है। अगर वे मन में ठान लें तो हर हाल में सफलता हासिल करके ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि एक शैक्षणिक संस्थान कार्य कुशलता और पद्धति की जानकारी दे सकता है लेकिन इसे लागू कहां करना है, इसका निर्णय छात्रों को स्वयं लेना होगा। उन्होंने छात्रों को अर्थपूर्ण जीवन जीने पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने किसान के घर में अपने जन्म से लेकर शिक्षाविद् बनने तक के सफर के संघर्षों के अनुभव भी मेधावियों के समक्ष साझा किए। अध्यक्षता करते हुए आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने संस्थान की उपलब्धियों, योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समारोह का संचालन आईआईटी के कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने किया। इस दौरान पदक और उपाधि धारकों के अभिभावकों सहित संस्थान के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।
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कार्निक ने कहा कि वर्तमान दौर में जिस तरह तकनीक के क्षेत्र में नई-नई खोज हो रही है। ऐसे में भावी इंजीनियरों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। एक इंजीनियर की सोच हमेशा तार्किक और समाज के लिए उपयोगी होनी चाहिए। 21वीं सदी में तकनीकी विकास के साथ-साथ नव प्रवर्तन से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।
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दीक्षांत समारोह के मुख्य वक्ता शिक्षाविद और समाजसेवी सोमदेव त्यागी ने कहा कि आज के युवा बेहद क्षमतावान हैं। उनमें नेतृत्व-प्रतिनिधित्व करने की अद्भुत क्षमता है। अगर वे मन में ठान लें तो हर हाल में सफलता हासिल करके ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि एक शैक्षणिक संस्थान कार्य कुशलता और पद्धति की जानकारी दे सकता है लेकिन इसे लागू कहां करना है, इसका निर्णय छात्रों को स्वयं लेना होगा। उन्होंने छात्रों को अर्थपूर्ण जीवन जीने पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने किसान के घर में अपने जन्म से लेकर शिक्षाविद् बनने तक के सफर के संघर्षों के अनुभव भी मेधावियों के समक्ष साझा किए। अध्यक्षता करते हुए आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने संस्थान की उपलब्धियों, योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समारोह का संचालन आईआईटी के कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने किया। इस दौरान पदक और उपाधि धारकों के अभिभावकों सहित संस्थान के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।
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