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जले ट्रांसफार्मरों की ढुलाई में लाखों का गोलमाल
Updated Sat, 16 Sep 2017 02:15 AM IST
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सेवापुरी। जले ट्रांसफार्मरों की ढुलाई में लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है। बिजली विभाग ट्रांसफार्मर ढुलाई के खर्च का भुगतान संबंधित एजेंसियों को बिल-बाउचर जमा करने पर करता है, ऐसी व्यवस्था है। बावजूद इसके संबंधित ठेकेदार ग्रामीणों को जले ट्रांसफार्मर को वर्कशाप तक पहुंचाने के लिए बाध्य करते हैं। कई बार ठेकेदार इतना समय लगा देता है कि ग्रामीण न चाहते हुए भी चंदा जुटाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिए जिले में वर्कशाप के माध्यम से कार्यदायी संस्थाओं के तहत ठेकेदारों की तैनाती की गई है। जो शहर और देहात में जले ट्रांसफार्मरों को सरकारी ख़र्चे पर वर्कशाप तक ले जाएंगे और बनने के बाद उसे अमुक स्थान पर पहुंचाएंगे। लेकिन वर्कशाप के अधिकारी और ठेकेदारों ने व्यवस्था ही उलट दी है। किसान जले ट्रांसफार्मरों की सूचना टोल फ्री नंबर पर देने के साथ संबंधित एसडीओ और जेई को भी देते है। जेई जले अथवा खराब ट्रांसफार्मरों के कागज (इंडेंट) को तैयार कर वर्कशाप को भेज देते हैं। लेकिन ठेकेदार ट्रांसफार्मर को वर्कशाप ले ही नहीं जाता। इसमें तमाम बहानेबाजी कर इतना वक्त लगा देता है कि लोग परेशान होकर ट्रांसफार्मर को निजी वाहन कर वर्कशाप पहुंचाते हैं। इसके लिए चंदा जुटाना लोगों की मजबूरी बन जाती है। जबकि वर्कशाप के अधिकारी और ठेकेदार इसी ट्रांसफार्मर की ढुलाई का भुगतान विभाग से स्वीकृत कराकर अपनी जेब में डाल लेते हैं। यह शिकायतें सब स्टेशन सेवापुरी, बरकी, लालपुर, दींदासपुर, बरनी, ठठरा आदि से जुड़े सैकड़ों गांवों की हैं। जहां जले ट्रांसफार्मरों की ढुलाई के लिए लोगों को चंदा वसूलना पड़ा है। ग्रामीण कहते हैं कि पूरे जिले में इस तरह का गोलमाल किया जा रहा है। अगर गहराई से जांच कराई जाए तो बड़ा गोलमाल सामने आएगा।
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उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिए जिले में वर्कशाप के माध्यम से कार्यदायी संस्थाओं के तहत ठेकेदारों की तैनाती की गई है। जो शहर और देहात में जले ट्रांसफार्मरों को सरकारी ख़र्चे पर वर्कशाप तक ले जाएंगे और बनने के बाद उसे अमुक स्थान पर पहुंचाएंगे। लेकिन वर्कशाप के अधिकारी और ठेकेदारों ने व्यवस्था ही उलट दी है। किसान जले ट्रांसफार्मरों की सूचना टोल फ्री नंबर पर देने के साथ संबंधित एसडीओ और जेई को भी देते है। जेई जले अथवा खराब ट्रांसफार्मरों के कागज (इंडेंट) को तैयार कर वर्कशाप को भेज देते हैं। लेकिन ठेकेदार ट्रांसफार्मर को वर्कशाप ले ही नहीं जाता। इसमें तमाम बहानेबाजी कर इतना वक्त लगा देता है कि लोग परेशान होकर ट्रांसफार्मर को निजी वाहन कर वर्कशाप पहुंचाते हैं। इसके लिए चंदा जुटाना लोगों की मजबूरी बन जाती है। जबकि वर्कशाप के अधिकारी और ठेकेदार इसी ट्रांसफार्मर की ढुलाई का भुगतान विभाग से स्वीकृत कराकर अपनी जेब में डाल लेते हैं। यह शिकायतें सब स्टेशन सेवापुरी, बरकी, लालपुर, दींदासपुर, बरनी, ठठरा आदि से जुड़े सैकड़ों गांवों की हैं। जहां जले ट्रांसफार्मरों की ढुलाई के लिए लोगों को चंदा वसूलना पड़ा है। ग्रामीण कहते हैं कि पूरे जिले में इस तरह का गोलमाल किया जा रहा है। अगर गहराई से जांच कराई जाए तो बड़ा गोलमाल सामने आएगा।
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