Varanasi: 73 साल के बुजुर्ग की सोशल मीडिया पर विदेशी युवती से दोस्ती, चैटिंग के बाद गंवा दिए 9.35 लाख रुपये
आईआईटी-बीएचयू से वर्ष 1973 के स्नातक पदम चंद अग्रवाल की फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से सिलविया रिचर्ड नामक युवती ने उनसे दोस्ती की। बातचीत के क्रम में युवती ने दवा कारोबार में 35 फीसदी मुनाफे की बात कही और झांसे में ले लिया।
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वाराणसी के 73 वर्षीय बुजुर्ग की सोशल मीडिया पर एक युवती से दोस्ती हुई, फिर उसके झांसे में आकर नौ लाख 35 हजार रुपये गंवा दिए। प्रकरण को लेकर छावनी क्षेत्र के बंगला नंबर-16 निवासी पदम चंद अग्रवाल की तहरीर के आधार पर सारनाथ स्थित साइबर क्राइम थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
भुक्तभोगी पदम चंद अग्रवाल ने बताया कि वह आईआईटी-बीएचयू से वर्ष 1973 के स्नातक हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से सिलविया रिचर्ड नाम युवती ने उनसे दोस्ती की। बातचीत के क्रम में युवती ने एक मेडिकल कंपनी को दवा बनाने के लिए केमिकल एक्सपोर्ट करने का लालच दिया और 35 फीसदी मुनाफे की बात कही।
पैसा जमा करने के बाद कंपनी ने केमिकल भेजा
यह भी बताया कि केमिकल कहां से उठाना और कहां बेचना है, इस काम में वह मदद करेगी। सिलविया रिचर्ड की बातों पर भरोसा कर उन्होंने एक नई फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया और व्यापार संबंधी अन्य औपचारिकताएं पूरी की। फिर केमिकल खरीदने के लिए सिलविया रिचर्ड द्वारा बताई गई मुंबई स्थित एक कंपनी के खाते में अपने तीन अकाउंट से नौ लाख 35 हजार रुपये ट्रांसफर किए।
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पैसा जमा करने के बाद उस कंपनी की अनीता जैन ने उन्हें फोन कर केमिकल भेजा। फिर, सिलविया रिचर्ड ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम से जॉन डेविड पूरा केमिकल खरीद लेंगे। जॉन डेविड से कई बार बात हुई और उसने कई बार बनारस आने का आश्वासन देकर पर्चेज ऑर्डर भी ई-मेल किया।
मगर, आज तक कोई उनका केमिकल खरीदने नहीं आया। पदम चंद अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि जो नौ लाख 35 हजार रुपये गंवाए हैं, उसमें से आधी रकम अपने रिश्तेदारों से उधार ली थी। इस संबंध में साइबर क्राइम थाना प्रभारी विजय नारायण मिश्र ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मोबाइल व खाता नंबरों और ई-मेल की मदद से प्रकरण की जांच की जा रही है।
बीते 15 दिनों में तीन आईआईटीयन साइबर क्राइम के शिकार
तकनीक के अच्छे जानकार माने जाने वाले आईआईटी-बीएचयू से जुड़े तीन लोग बीते 15 दिनों में साइबर क्राइम के शिकार हो चुके हैं। पदम चंद अग्रवाल से पहले बीते 11 अक्तूबर को आईआईटी-बीएचयू से रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. तिलक राज मानखंड की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया था।
डॉ. मानखंड एक स्पीड पोस्ट को ट्रैक करते समय एक अनजान मोबाइल नंबर पर कॉल कर 94 हजार रुपये गवां दिए थे। इसी तरह चार अक्तूबर को आईआईटी-बीएचयू की छात्रा आर्या भगत की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आर्या भगत को उनके पिता के दोस्त बन कर एक जालसाज ने पांच हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया था।