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लब पर दुआएं, आंखों में आंसू, जायरीन चले मक्का मदीना
Updated Sun, 22 Jul 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। लब पर दुआएं थी, आंखों में आंसू थे और हज की तमन्ना लिए शनिवार को 274 जायरीन मक्का-मदीना के लिए रवाना हुए। इसमें सर्वाधिक 61 लोग बनारस के रहे। बड़ी तादात में पहुंचे लोगों ने अपने परिवारीजनों को नम आंखों के साथ विदा किया। मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने हाजियों के बस को रवाना किया।
सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट से एयरपोर्ट जाने के लिए चार बसों से देर शाम सभी जायरीन रवाना हो गए। इधर दोपहर बाद से ही हज हाउस में बनारस, इलाहाबाद, गोरखपुर, जौनपुर आदि जिलों से परिवार संग जायरीन पहुंचने लगे। यहां नियमानुसार हज संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही यहां से सभी को एयरपोर्ट के लिए भेजा गया। पहली फ्लाइट से रात में 12 बजे और दूसरी से रात एक बजे जायरीन काशी से काबा के लिए उड़ान भरे। उलेमाओ संग दुआख्वानी के बाद मौलाना अब्दुल बातिन ने सभी को रवाना किया। उन्होंने हाजियों के सफर को आसान करने एवं मुल्क की तरक्की और खुशामदीद के लिए दुआएं की। हज कैंपस में नारे तकबीर की गूंज होती रही। इस मौके पर सेण्ट्रल हज कमेटी, भारत सरकार के सदस्य एवं वाराणसी इम्बॉर्केेशन केन्द्र के को-ऑर्डिनेटर डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद, हाजी रईस अहमद, मोहम्मद इमरान, साजिद खान सोनू, सलमान शाहिद, सेराज फारुकी, मोहम्मद ज़फर समेत काफी लोग मौजूद थे।
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सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट से एयरपोर्ट जाने के लिए चार बसों से देर शाम सभी जायरीन रवाना हो गए। इधर दोपहर बाद से ही हज हाउस में बनारस, इलाहाबाद, गोरखपुर, जौनपुर आदि जिलों से परिवार संग जायरीन पहुंचने लगे। यहां नियमानुसार हज संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही यहां से सभी को एयरपोर्ट के लिए भेजा गया। पहली फ्लाइट से रात में 12 बजे और दूसरी से रात एक बजे जायरीन काशी से काबा के लिए उड़ान भरे। उलेमाओ संग दुआख्वानी के बाद मौलाना अब्दुल बातिन ने सभी को रवाना किया। उन्होंने हाजियों के सफर को आसान करने एवं मुल्क की तरक्की और खुशामदीद के लिए दुआएं की। हज कैंपस में नारे तकबीर की गूंज होती रही। इस मौके पर सेण्ट्रल हज कमेटी, भारत सरकार के सदस्य एवं वाराणसी इम्बॉर्केेशन केन्द्र के को-ऑर्डिनेटर डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद, हाजी रईस अहमद, मोहम्मद इमरान, साजिद खान सोनू, सलमान शाहिद, सेराज फारुकी, मोहम्मद ज़फर समेत काफी लोग मौजूद थे।
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