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दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए...
Updated Wed, 27 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए...उमराव जान फिल्म का यह गीत हर किसी ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। बावजूद इसके बहुत कम लोग ही जानते हैं कि जिस मशहूर उमराव जान पर यह फिल्म बनी थी उनका मकबरा काशी में ही है। मौत के 80 साल बाद उनकी बरसी पर गुमनामी में डूबे उनके मकबरे को पहचान भी मिल गई। फातमान कब्रिस्तान में उमराव जान के मकबरे पर मंगलवार को 80वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
डर्बीशायर क्लब के सदस्यों ने फातमान स्थित उनकी क ब्र पर गुलपोशी कर शमां रौशन की और फातेहा भी पढ़ा। आयोजन करने वाले क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि फैजाबाद में जन्मी उमराव जान के बचपन का नाम अमीरन बीबी था। बाद में लखनऊ आने पर उनका नाम उमराव जान पड़ गया। यहीं पर उन्होंने संगीत व नृत्य की शिक्षा दीक्षा ली। उमराव जान ऐसी बेहतरीन फनकारा थीं, जिनका नाम पूरे देश में मशहूर था लेकिन दुर्भाग्यवश जिंदगी के अंतिम दिनों में वह बिल्कुल अकेली पड़ गयीं। उमराव ने बनारस का रुख किया। यहीं पर 26 दिसंबर 1937 को उन्होंने अंतिम सांस ली। शकील ने बताया कि उमरावजान चौक के गोविंदपुरा मोहल्ले में रहती थीं। यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनको फातमान स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया लेकिन किसी को इसकी जानकारी ही नहीं थी। 2004 में उनको उमराव की कब्र की जानकारी मिली। इस दौरान हुसैन मौलाई, प्रमोद वर्मा, गुलशन कपूर, बबलू विश्वकर्मा, बाले शर्मा, विक्की यादव, आचार्य वागीशदत्त शास्त्री, विजयशंकर पांडेय, अजय सिंह, संदीप आदि मौजूद रहे।
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डर्बीशायर क्लब के सदस्यों ने फातमान स्थित उनकी क ब्र पर गुलपोशी कर शमां रौशन की और फातेहा भी पढ़ा। आयोजन करने वाले क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि फैजाबाद में जन्मी उमराव जान के बचपन का नाम अमीरन बीबी था। बाद में लखनऊ आने पर उनका नाम उमराव जान पड़ गया। यहीं पर उन्होंने संगीत व नृत्य की शिक्षा दीक्षा ली। उमराव जान ऐसी बेहतरीन फनकारा थीं, जिनका नाम पूरे देश में मशहूर था लेकिन दुर्भाग्यवश जिंदगी के अंतिम दिनों में वह बिल्कुल अकेली पड़ गयीं। उमराव ने बनारस का रुख किया। यहीं पर 26 दिसंबर 1937 को उन्होंने अंतिम सांस ली। शकील ने बताया कि उमरावजान चौक के गोविंदपुरा मोहल्ले में रहती थीं। यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनको फातमान स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया लेकिन किसी को इसकी जानकारी ही नहीं थी। 2004 में उनको उमराव की कब्र की जानकारी मिली। इस दौरान हुसैन मौलाई, प्रमोद वर्मा, गुलशन कपूर, बबलू विश्वकर्मा, बाले शर्मा, विक्की यादव, आचार्य वागीशदत्त शास्त्री, विजयशंकर पांडेय, अजय सिंह, संदीप आदि मौजूद रहे।
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