काशी विश्वनाथ मंदिर मणिमाला का बताएंगे इतिहास, कॉरिडोर में 63 शिवालय होंगे खास
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काशीपुराधिपति के भव्य दरबार में शामिल मंदिर मणिमाला का इतिहास देश और दुनिया के भक्तों तक पहुंचाया जाएगा। कॉरिडोर के 63 शिवालयों को खास बनाने के लिए उनके स्थापना से लेकर आध्यात्मिक महात्म्य को सहेजा जा रहा है। एक खास एप्लीकेशन की मदद से इन मंदिरों का महत्व भक्तों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए बीएचयू के डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री के साथ ही आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का भी सहयोग लिया जा रहा है।
50 हजार वर्गमीटर में तैयार हो रहे श्री काशी विश्वनाथ धाम में शामिल किए गए 63 ऐतिहासिक मंदिरों से श्रद्धालुओं को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण के दौरान ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में 63 ऐसे पुरातन मंदिर निकले हैं, जिनका अपना एक अलग इतिहास है। इन्हीं मंदिरों के इतिहास को बताने के लिए एक एप्लीकेशन बनाया जा रहा है।
इसके माध्यम से कॉरिडोर में बने मंदिरों के नजदीक आते ही उस मंदिर का इतिहास ऑडियो-वॉइस के जरिए लोगों को सुनाई देगा, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। इन ऐतिहासिक मंदिरों को एक्सपर्ट टीम की मदद से कार्बन डेटिंग के जरिये संजोया जा रहा है। साथ ही मंदिरों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। डिजिटली जागरूक नहीं रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए मैनुअल सिस्टम भी रखा जाएगा। जिस दिन काशी विश्वनाथ धाम परियोजना जनता को समर्पित होगी, उसी दिन यह एप भी लॉंच किया जाएगा।
धाम में होने वाले बदलाव की बन रही रिपोर्ट
काशी विश्वनाथ धाम के डीपीआर के बाद उसकी डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है। इसमें जलासेन घाट पर बनने वाली जेटी का आकार बढ़ाए जाने, संग्रहालय और पुस्तकालय की डिजाइन सहित कई बदलाव पर निर्णय लिया गया है। शासन ने अब तक किए गए बदलाव और भविष्य में संभावित संशोधन की रिपोर्ट 15 अप्रैल तक मांगी है।
व्यूइंग गैलरी से दिखेगा गंगा का नजारा
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर सुंदरीकरण एवं विस्तारीकरण परियोजना के तहत बनाए जा रहे कारिडोर में गंगा व्यूइंग गैलरी शामिल की गई है। इसे जलासेनघाट के ऊपरी हिस्से में आकार दिया जाएगा। लगभग 80 मीटर लंबे और 40 फीट चौड़ी गैलरी के पास ही फूड कोर्ट भी बनाया जाएगा। निचले हिस्से में भी प्लेटफार्म बनेगा जहां से श्रद्धालु व पर्यटक गंगा का नजारा ले सकेंगे।
धाम में शामिल 63 मंदिरों के इतिहास को संजोया जा रहा है। इसके लिए बीएचयू और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से मदद भी ली जा रही है। 15 अप्रैल तक शासन को कॉरिडोर में होने वाले बदलाव की रिपोर्ट दी जानी है।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त