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एनजीटी की जांच में सामने आई साफ-सफाई की सच्चाई
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वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, मंडलीय अस्पताल से लेकर शहर के निजी अस्पतालों में लापरवाही का संज्ञान लेते हुए यूपी एनजीटी के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ने इसके खतरों के प्रति आगाह किया है। कहा, हालात यही रहने पर अस्पताल के मरीज ही नहीं, शहर के लोग भी संक्रमण की चपेट में आ जाते। साफ कहा, अगर लापरवाही पर लगाम नहीं लगी तो गोरखपुर मेडकिल कॉलेज में बच्चों की मौत जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से नहीं रोका जा सकेगा।
इस बीच लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर बड़ा जुर्माना लगाने की तैयारी है। टीम के सचिव राजेंद्र सिंह ने बताया कि आठ फरवरी को लखनऊ में बैठक है। बैठक में इन सभी रिपोर्ट को कमेटी के सामने रखा जाएगा। कमेटी इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही वे सभी कंपनियां भी जिम्मेदार बनेंगी, जो यहां पर कचरा निस्तारण में लापरवाही कर रही हैं। ग्रामीणों को बीमारियां बांट रही हैं। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने भी की है।
तीन दिन तक शहर में भ्रमण के दौरान चेयरमैन और उनकी टीम ने मेडिकल वेस्ट, सालिड वेस्ट और नदियों के प्रदूषण की जांच की। टीम ने जहां सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में खुले में फेंके जा रहे मानव अंग देखे तो मंडलीय अस्पताल के हालात इतने बदतर मिले कि चेयरमैन को टिप्पणई करनी पड़ी कि यहां इलाज कराने वाले बच्चों और बूढ़ों को संक्रमण से कोई नहीं बचा सकता है। ट्रॉमा सेंटर में अव्यवस्था का आलम यह है कि वहां बंद एक कमरे को कहने के बाद भी नहीं खोला गया। मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में जब यह कमरा खुला तो वहां पैकेट में बांधकर रखे गए मानव अंग और गंदगी मिली। न्यायमूर्ति ने बताया कि बीएचयू के पास न तो फंड की कमी है और न ही संसाधनों की लेकिन निगरानी में लापरवाही के कारण हालात खराब हैं। अस्पताल में चार अलग-अलग तरह के कचरे निकलते हैं, जिनको अलग रखना चाहिए, लेकिन ये सभी मिला रहे हैं।
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निजी अस्पतालों की दुर्व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लापरवाही लोगों को रोग बांट रही है। इसके लिए सीएमएस और सीएमओ दोनों जिम्मेदार हैं। निजी अस्पतालों द्वारा अपना कचरा तो सही दिया जा रहा है लेकिन रक्त और गंदगी सीवर में डाली जा रही है। यही नहीं, करसड़ा कूड़ा निस्तारण संयत्र की जांच में पाया गया कि यहां कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए प्लास्टिक को जमीन में गाड़ दिया था। जमीन की खुदाई करने पर पता चला कि ऐसा लंबे समय से किया जा रहा था। इसके लिए नगर निगम को चेतावनी देने के साथ ही निगरानी बढ़ाने की हिदायत दी गई है।
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इस बीच लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर बड़ा जुर्माना लगाने की तैयारी है। टीम के सचिव राजेंद्र सिंह ने बताया कि आठ फरवरी को लखनऊ में बैठक है। बैठक में इन सभी रिपोर्ट को कमेटी के सामने रखा जाएगा। कमेटी इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही वे सभी कंपनियां भी जिम्मेदार बनेंगी, जो यहां पर कचरा निस्तारण में लापरवाही कर रही हैं। ग्रामीणों को बीमारियां बांट रही हैं। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने भी की है।
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तीन दिन तक शहर में भ्रमण के दौरान चेयरमैन और उनकी टीम ने मेडिकल वेस्ट, सालिड वेस्ट और नदियों के प्रदूषण की जांच की। टीम ने जहां सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में खुले में फेंके जा रहे मानव अंग देखे तो मंडलीय अस्पताल के हालात इतने बदतर मिले कि चेयरमैन को टिप्पणई करनी पड़ी कि यहां इलाज कराने वाले बच्चों और बूढ़ों को संक्रमण से कोई नहीं बचा सकता है। ट्रॉमा सेंटर में अव्यवस्था का आलम यह है कि वहां बंद एक कमरे को कहने के बाद भी नहीं खोला गया। मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में जब यह कमरा खुला तो वहां पैकेट में बांधकर रखे गए मानव अंग और गंदगी मिली। न्यायमूर्ति ने बताया कि बीएचयू के पास न तो फंड की कमी है और न ही संसाधनों की लेकिन निगरानी में लापरवाही के कारण हालात खराब हैं। अस्पताल में चार अलग-अलग तरह के कचरे निकलते हैं, जिनको अलग रखना चाहिए, लेकिन ये सभी मिला रहे हैं।
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निजी अस्पतालों की दुर्व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लापरवाही लोगों को रोग बांट रही है। इसके लिए सीएमएस और सीएमओ दोनों जिम्मेदार हैं। निजी अस्पतालों द्वारा अपना कचरा तो सही दिया जा रहा है लेकिन रक्त और गंदगी सीवर में डाली जा रही है। यही नहीं, करसड़ा कूड़ा निस्तारण संयत्र की जांच में पाया गया कि यहां कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए प्लास्टिक को जमीन में गाड़ दिया था। जमीन की खुदाई करने पर पता चला कि ऐसा लंबे समय से किया जा रहा था। इसके लिए नगर निगम को चेतावनी देने के साथ ही निगरानी बढ़ाने की हिदायत दी गई है।