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परीक्षा शुरू होने में 36 घंटे बाकी, परीक्षकों को पता ही नहीं कहां लेना है इम्तहान
Updated Thu, 14 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षा का पहला चरण 15 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इसमें परीक्षकों को पता ही नहीं है कि उन्हें कहां इम्तिहान लेना है। बोर्ड ने किसे कहां के लिए परीक्षक नियुक्त किया है इसकी जानकारी अभी तक परीक्षकों को नहीं है। इस चरण में मिर्जापुर और फैजाबाद मंडल के आठ जिलों के विद्यालयों में परीक्षा होनी है। इस संबंध में बोर्ड मुख्यालय ने क्षेत्रीय कार्यालयों को सर्कुलर जारी कर कहा है कि वे सभी संबंधित संयुक्त शिक्षा निदेशक के मार्फत विद्यालय परीक्षकों को सूचित कर परीक्षा की तिथि तय करेंगे।
बोर्ड मुख्यालय से 12 दिसंबर को जारी हुआ पत्र 13 दिसंबर को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय पहुंचा। बोर्ड मुख्यालय से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि परीक्षक सूची का सत्यापन विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे। वो बताएंगे कि अमुक शिक्षक परीक्षक बनने की योग्यता रखता है या नहीं। परीक्षक को जिस विद्यालय का शिक्षक बताया गया है वहां वह तैनात है कि नहीं, कहीं डिबार शिक्षक को दोबार परीक्षक तो नहीं बना दिया गया है। ये सारी जानकारी प्रधानाचार्य जिला विद्यालय निरीक्षक माध्यम से बोर्ड को भेजेंगे। बोर्ड मुख्यालय से जारी परिपत्र में बताया गया है कि पिछले साल की तरह इस बार भी प्रायोगिक परीक्षा के कुल पूर्णांक का 50 फीसदी आंतरिक व 50 फीसदी वाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा ली जाएगी। बताया जा रहा है कि ऐसा पारदर्शिता के तहत किया गया है। लेकिन इस मुद्दे पर शिक्षक कहते हैं कि जब प्रधानाचार्य को ही परीक्षक बुलाना है तो वह जिसे चाहे बुलाए, जिसे चाहे परीक्षक बनने से अयोग्य ठहरा दें। आखिर कौन प्रधानाचार्य चाहेगा कि उसके विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल में नंबर कम मिले।
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बोर्ड मुख्यालय से 12 दिसंबर को जारी हुआ पत्र 13 दिसंबर को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय पहुंचा। बोर्ड मुख्यालय से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि परीक्षक सूची का सत्यापन विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे। वो बताएंगे कि अमुक शिक्षक परीक्षक बनने की योग्यता रखता है या नहीं। परीक्षक को जिस विद्यालय का शिक्षक बताया गया है वहां वह तैनात है कि नहीं, कहीं डिबार शिक्षक को दोबार परीक्षक तो नहीं बना दिया गया है। ये सारी जानकारी प्रधानाचार्य जिला विद्यालय निरीक्षक माध्यम से बोर्ड को भेजेंगे। बोर्ड मुख्यालय से जारी परिपत्र में बताया गया है कि पिछले साल की तरह इस बार भी प्रायोगिक परीक्षा के कुल पूर्णांक का 50 फीसदी आंतरिक व 50 फीसदी वाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा ली जाएगी। बताया जा रहा है कि ऐसा पारदर्शिता के तहत किया गया है। लेकिन इस मुद्दे पर शिक्षक कहते हैं कि जब प्रधानाचार्य को ही परीक्षक बुलाना है तो वह जिसे चाहे बुलाए, जिसे चाहे परीक्षक बनने से अयोग्य ठहरा दें। आखिर कौन प्रधानाचार्य चाहेगा कि उसके विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल में नंबर कम मिले।
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