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केंद्र-राज्य को भेजी जाएगी शंकराचार्य चयन की रिपोर्ट
Updated Tue, 12 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर चयन के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया से केंद्र और राज्य सरकारों को भी अवगत कराया जाएगा। केंद्रीय संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव और सूबे के प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) को शंकराचार्य चयन से जुड़ी जानकारियां भारत धर्म महामंडल की ओर से भेजी जाएंगी। सोमवार को भारत धर्म महामंडल के चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह और जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभू उपाध्याय ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में शुरू हुई चयन प्रक्रिया की रिपोर्ट तैयार कराई। मंगलवार को प्रमुख सचिवों को इसे भेजा जाएगा।
महामंडल के जनरल सेक्रेटरी की ओर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख सचिव (संस्कृति) और धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव के नाम संबोधित रिपोर्ट तैयार कराई गई है। इसमें कहा गया है कि 22 सितंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए ज्योतिष्पीठ पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दोनों का दावा अमान्य कर इस पीठ को रिक्त कर दिया था। इसके साथ ही सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी आध्यात्मिक संस्था भारत धर्म महामंडल को कहा है कि वह ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर तीनों पीठों के शंकराचार्यों, पंडितों, प्रकांड विद्वानों से अभिमत लेकर योग्य संन्यासी का चयन करे। निर्णय की तिथि से तीन माह के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। तीन महीने की अवधि 22 दिसंबर को पूरी होगी। महामंडल ने कहा है कि 20 दिसंबर तक इस पद के लिए नाम आमंत्रित किए गए हैं। इसके बाद योग्य संन्यासी के नाम पर अभिमत के आधार पर सहमति बनाई जाएगी। चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में ही यह कदम उठाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने संस्कृति मंत्रालय और धर्मार्थ कार्य मंत्रालय को भी फैसले की प्रतियां भेजी हैं।
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महामंडल के जनरल सेक्रेटरी की ओर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख सचिव (संस्कृति) और धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव के नाम संबोधित रिपोर्ट तैयार कराई गई है। इसमें कहा गया है कि 22 सितंबर को हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए ज्योतिष्पीठ पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दोनों का दावा अमान्य कर इस पीठ को रिक्त कर दिया था। इसके साथ ही सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी आध्यात्मिक संस्था भारत धर्म महामंडल को कहा है कि वह ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर तीनों पीठों के शंकराचार्यों, पंडितों, प्रकांड विद्वानों से अभिमत लेकर योग्य संन्यासी का चयन करे। निर्णय की तिथि से तीन माह के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। तीन महीने की अवधि 22 दिसंबर को पूरी होगी। महामंडल ने कहा है कि 20 दिसंबर तक इस पद के लिए नाम आमंत्रित किए गए हैं। इसके बाद योग्य संन्यासी के नाम पर अभिमत के आधार पर सहमति बनाई जाएगी। चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में ही यह कदम उठाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने संस्कृति मंत्रालय और धर्मार्थ कार्य मंत्रालय को भी फैसले की प्रतियां भेजी हैं।
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