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पंजाब के संन्यासी ने ज्योतिष्पीठ पर की दावेदारी
Updated Tue, 21 Nov 2017 02:14 AM IST
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वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद के लिए संत दावेदारी ठोंकने लगे हैं। पंजाब के लुधियाना स्थित संस्कृत धर्मसंघ विद्यापीठ के दंडी संन्यासी स्वामी देवस्वरूप महाराज ने सोमवार को भारत धर्म महामंडल के समक्ष शंकराचार्य पद पर अपना दावेदारी पेश की। सनातन धर्म के इस शीर्ष पद के लिए इनके अलावा कई संतों के नाम आए हैं। इन नामों पर विचार महामंडल की नेशनल कौंसिल की बैठक में किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य के चयन को लेकर मची खींचतान के बीच धर्म महामंडल दो खेमों में बंट गया है। इस अहम मसले पर दोनों खेमों ने अलग-अलग तिथियों पर मंत्री सभा की बैठकें बुलाई हैं। ऐसे में शंकराचार्य के नाम पर सर्वानुमति बनाना टेढ़ी खार साबित होगा।
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद के लिए भारत धर्म महामंडल की पहली बैठक से ही विवाद छिड़ गया है। खींचतान के बीच सोमवार को महामंडल के जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह को लुधियाना के संस्कृत धर्मसंघ विद्यापीठ के दंडी संन्यासी स्वामी देवव्रत महाराज ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अपना दावेदारी ठोंक दी। कुरियर के जरिए उन्होंने अपना आवेदन जनरल सेक्रेटरी के नाम भेजा है। प्यारे सिंह ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कुछ और नाम आए हैं। सात दिसंबर को मंत्री सभा की बैठक के बाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अर्हता रखने वाले संन्यासी के नाम पर विचार किया जाएगा। उधर, महामंडल के सात पदाधिकारियों की ओर से हस्ताक्षरित पत्र के आधार पर 24 नवंबर को मंत्री सभा की बैठक बुलाने के लिए अलग से जारी किए गए एजेंडे पर भी बहुमत जुटाने के लिए मशक्कत की जा रही है। इन पदाधिकारियों ने बैठक बुलाने को लोकर जनरल सेक्रेटरी को पत्र भी भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की शम पांच बजे महामंडल सभाकक्ष में पहली बैठक आयोजित थी लेकिन सदस्यों के बैठने की व्यवस्था सभागार के बाहर की गई थी। बैठक की कार्यवाही के दौरान मंत्री सभा के अध्यक्ष राय गिरीश चंद्र संज्ञाशून्य एवं पूर्ण रूप से अस्वस्थता की स्थिति में कार में लादकर लाए गए थे। तब उच्च पदाधिकारी पं. दयानिधि मिश्र ने कहा था कि उनकी अध्यक्षता कार में लेटे हुए ही मान ली जाए, लेकिन विरोध होने के कारण राय गिरीश की अध्यक्षता नहीं मानी गई। इससे नाराज जनरल सेक्रेटरी ने बैठक स्थगित कर दी। लेकिन सदस्यों के विरोध के चलते बैठक स्थगत की सूचना को कार्यवाही पुस्तिका से काट दिया गया था। इसके बाद महामंडल की नियमावली की धारा 37 के तहत अध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण उपाध्यक्ष शशिनंदन लाल दर का नाम अध्यक्षता के लिए प्रस्तावित किया गया था। इसे भी जनरल सेक्रेटरी ने स्वीकार नहीं किया, अलबत्ता वह रजिस्टर लेकर चले गए थे। अंतत: वहं मौजूद सदस्यों ने नया कार्यवाही रजिस्टर बनाकर शशिनंदन की अध्यक्षता में मंत्री सभा की बैठक की थी। इसकी सूचना निबंधक फर्म सोसाइटीज एवं चिट्स और डीएम को भेज गई है। इसी आधार पर 24 नवंबर को इस धड़े ने मंत्री सभा की बैठक शंकराचार्य चयन के लिए बुलाई है। उधर, जनरल सेक्रेटरी प्यारे सिंह ने इस धड़े की कार्यवाही को अवैधानिक करार दिया है।
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ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद के लिए भारत धर्म महामंडल की पहली बैठक से ही विवाद छिड़ गया है। खींचतान के बीच सोमवार को महामंडल के जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह को लुधियाना के संस्कृत धर्मसंघ विद्यापीठ के दंडी संन्यासी स्वामी देवव्रत महाराज ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अपना दावेदारी ठोंक दी। कुरियर के जरिए उन्होंने अपना आवेदन जनरल सेक्रेटरी के नाम भेजा है। प्यारे सिंह ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कुछ और नाम आए हैं। सात दिसंबर को मंत्री सभा की बैठक के बाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अर्हता रखने वाले संन्यासी के नाम पर विचार किया जाएगा। उधर, महामंडल के सात पदाधिकारियों की ओर से हस्ताक्षरित पत्र के आधार पर 24 नवंबर को मंत्री सभा की बैठक बुलाने के लिए अलग से जारी किए गए एजेंडे पर भी बहुमत जुटाने के लिए मशक्कत की जा रही है। इन पदाधिकारियों ने बैठक बुलाने को लोकर जनरल सेक्रेटरी को पत्र भी भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की शम पांच बजे महामंडल सभाकक्ष में पहली बैठक आयोजित थी लेकिन सदस्यों के बैठने की व्यवस्था सभागार के बाहर की गई थी। बैठक की कार्यवाही के दौरान मंत्री सभा के अध्यक्ष राय गिरीश चंद्र संज्ञाशून्य एवं पूर्ण रूप से अस्वस्थता की स्थिति में कार में लादकर लाए गए थे। तब उच्च पदाधिकारी पं. दयानिधि मिश्र ने कहा था कि उनकी अध्यक्षता कार में लेटे हुए ही मान ली जाए, लेकिन विरोध होने के कारण राय गिरीश की अध्यक्षता नहीं मानी गई। इससे नाराज जनरल सेक्रेटरी ने बैठक स्थगित कर दी। लेकिन सदस्यों के विरोध के चलते बैठक स्थगत की सूचना को कार्यवाही पुस्तिका से काट दिया गया था। इसके बाद महामंडल की नियमावली की धारा 37 के तहत अध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण उपाध्यक्ष शशिनंदन लाल दर का नाम अध्यक्षता के लिए प्रस्तावित किया गया था। इसे भी जनरल सेक्रेटरी ने स्वीकार नहीं किया, अलबत्ता वह रजिस्टर लेकर चले गए थे। अंतत: वहं मौजूद सदस्यों ने नया कार्यवाही रजिस्टर बनाकर शशिनंदन की अध्यक्षता में मंत्री सभा की बैठक की थी। इसकी सूचना निबंधक फर्म सोसाइटीज एवं चिट्स और डीएम को भेज गई है। इसी आधार पर 24 नवंबर को इस धड़े ने मंत्री सभा की बैठक शंकराचार्य चयन के लिए बुलाई है। उधर, जनरल सेक्रेटरी प्यारे सिंह ने इस धड़े की कार्यवाही को अवैधानिक करार दिया है।
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