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Updated Sun, 12 Nov 2017 10:22 PM IST
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गाजीपुर। कॉल सेंटर के सहारे दूसरे चरण के संघन मिशन इंद्रधनुष में बेहतर प्रदर्शन करने में स्वास्थ्य महकमा जुटा हुआ है। इस कॉल सेंटर की जिम्मेदारी तीन स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई है। पहले चरण में चले इस अभियान में जनपद का स्थान प्रदेश के दस खराब प्रदर्शन करने वाले में जनपदों में आने के बाद से जिलाधिकारी के बालाजी खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
‘सघन मिशन इंद्रधनुष’ का पहला चरण बीते नौ अक्तूबर से 17 अक्तूबर तक चलाया गया था। इस अभियान में विभाग की ओर से लक्ष्य पूर्ण न किए जाने से खराब प्रदर्शन होने पर शासन की ओर से विभाग के अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई गई। दूसरे चरण की शुरुआत बीते सात नवंबर से हुई। इस चरण में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नोडल अधिकारी डॉ. एके सिन्हा ने तीन स्वास्थ्य कर्मियों का गठन कर कॉल सेंटर स्थापित किया गया है। कॉल सेंटरों पर तैनात कर्मी अभियान में आ रही दिक्कतों और प्रतिदिन पूरे ब्लाक की रिपोर्ट की सूचना उच्चाधिकारियों को देने का काम करेंगे। साथ ही इनके द्वारा सत्र आयोजन होने के एक दिन पूर्व प्रतिदिन सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत बीसीपीएम और एचईओ से वार्ता कर आशा के द्वारा घर-घर भ्रमण करके 0 से दो वर्ष के बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं की सूची प्राप्त करेंगे। साथ ही प्रत्येक ब्लाक से कम से कम 10 आशा कार्यकर्ता से बात कर भ्रमण करने और सूची देने की प्रक्रिया को भी सत्यापित करेंगे। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि इस अभियान में लापरवाही बरतें जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
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‘सघन मिशन इंद्रधनुष’ का पहला चरण बीते नौ अक्तूबर से 17 अक्तूबर तक चलाया गया था। इस अभियान में विभाग की ओर से लक्ष्य पूर्ण न किए जाने से खराब प्रदर्शन होने पर शासन की ओर से विभाग के अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई गई। दूसरे चरण की शुरुआत बीते सात नवंबर से हुई। इस चरण में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नोडल अधिकारी डॉ. एके सिन्हा ने तीन स्वास्थ्य कर्मियों का गठन कर कॉल सेंटर स्थापित किया गया है। कॉल सेंटरों पर तैनात कर्मी अभियान में आ रही दिक्कतों और प्रतिदिन पूरे ब्लाक की रिपोर्ट की सूचना उच्चाधिकारियों को देने का काम करेंगे। साथ ही इनके द्वारा सत्र आयोजन होने के एक दिन पूर्व प्रतिदिन सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत बीसीपीएम और एचईओ से वार्ता कर आशा के द्वारा घर-घर भ्रमण करके 0 से दो वर्ष के बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं की सूची प्राप्त करेंगे। साथ ही प्रत्येक ब्लाक से कम से कम 10 आशा कार्यकर्ता से बात कर भ्रमण करने और सूची देने की प्रक्रिया को भी सत्यापित करेंगे। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि इस अभियान में लापरवाही बरतें जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
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