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चित्रकूट में राम के चरणों पर गिरे भरत
Updated Sun, 17 Sep 2017 02:23 AM IST
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रामनगर। छेदी पहलवान के अखाड़े के पास सगरा पोखरा से रामवाण पोखरा तक शनिवार की शाम चलायमान रामलीला देखने के लिए सैलाब उमड़ पड़ा। तरह-तरह के वेश-बाना में लीला प्रेमियों के माथे पर कहीं तिलक-त्रिपुंड लगाए जाते रहे तो कहीं इत्र-पुलेल।
लीला के दृश्य में चित्रकूट में भगवान श्रीराम को देख भाव विह्वल हुए भरत साष्टांग दंडवत करते हैं। भगवान श्रीराम उन्हें उठा कर हृदय से लगाते हैं। दोनों भाइयों की आंखें सजल हो जाती हैं। यह देख लक्ष्मण भी अपने आंसू रोक नहीं पाते। यह दृश्य देख देवता जय जयकार करने लगते हैं और चदुर्दिक प्रसन्नता की लहर छा जाती है।
रामनगर में 12 वें दिन की लीला में भरत का यमुनवतरण, ग्रामवासी मिलन, श्रीराम चंद्र दर्शन का मंचन किया गया। मुनि भरद्वाज के आश्रम में भरत जी प्रात: स्नान कर तीर्थ प्रयाग को प्रणाम कर चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। इसके पूर्व काशिराज अनंत नारायण सिंह को 36 वीं वाहिनी पीएसी के एफ कंपनी के जवानों ने प्लाटून कमांडर सुखदिल यादव की अगुवाई मे गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया।
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उधर, भगवान राम का मन ही मन भरत को याद कर अधीर हो उठते हैं। तभी इंद्र देव देवताओं से कहते हैं कि भरत और राम का मिलन न होने पाए। यह सुन बृहस्पति समझाते हैं कि सारा जग भगवान राम को जपता है। जो छल करेगा वह श्रीराम की क्रोधाग्नि में भस्म हो जाएगा। भरत जी यमुना तट पर पहुंचते हैं। निषादराज नाव से सभी को पार कराते हैं। राम जी का पता बताने वालो को भरत जी अत्यंत प्रेम करते हैं। रास्ते मे शगुन दिखाई पड़ता तब भरत बोलते हैं कि लगता है अब दर्शन होगा ।
उधर श्रीराम स्नान कर शंकर जी का पूजन करते हैं। तभी देखते हैं कि उत्तर दिशा में धूल उड़ रही है। पशु पंछी भाग रहे हैं। कोल -भील कहते - स्वामी लगता है कि आप के दोनो भाई आ रहे हैं। सीता सुन कर सोच में पड़ जाती हैं कि भरत क्यों आ रहे हैं । भरत जी आश्रम के समीप पहुंच रहे हैं । कामदगिरी के निकट भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के साथ ठहरने की जानकारी मिलने लगी। भरत जी पेड़ों की आड़ में हैं राम जी देख नहीं पाते। भरत करीब पहुंचते ही भगवान राम के चरण पर गिर पड़ते है। श्रीराम उन्हें उठा कर हृदय से लगाते हैं। उनकी आंखों में प्रेम मय आंसुओं की धार बहने लगती है। भगवान का मिलन देख देवता भी जय जयकार करने लगे। भगवान श्रीराम सबको ले कर आश्रम में ले जाते हैं। हर तरफ खुशी छाई रहती है। भरत रात भर जागते हुए यही सोचते रहते हैं कि भगवान राम अयोध्या वापस लौटेंगे कि नहीं। गुरु वशिष्ठ उन्हें इसके लिए कहेंगे या नहीं।
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लीला के दृश्य में चित्रकूट में भगवान श्रीराम को देख भाव विह्वल हुए भरत साष्टांग दंडवत करते हैं। भगवान श्रीराम उन्हें उठा कर हृदय से लगाते हैं। दोनों भाइयों की आंखें सजल हो जाती हैं। यह देख लक्ष्मण भी अपने आंसू रोक नहीं पाते। यह दृश्य देख देवता जय जयकार करने लगते हैं और चदुर्दिक प्रसन्नता की लहर छा जाती है।
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रामनगर में 12 वें दिन की लीला में भरत का यमुनवतरण, ग्रामवासी मिलन, श्रीराम चंद्र दर्शन का मंचन किया गया। मुनि भरद्वाज के आश्रम में भरत जी प्रात: स्नान कर तीर्थ प्रयाग को प्रणाम कर चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। इसके पूर्व काशिराज अनंत नारायण सिंह को 36 वीं वाहिनी पीएसी के एफ कंपनी के जवानों ने प्लाटून कमांडर सुखदिल यादव की अगुवाई मे गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया।
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उधर, भगवान राम का मन ही मन भरत को याद कर अधीर हो उठते हैं। तभी इंद्र देव देवताओं से कहते हैं कि भरत और राम का मिलन न होने पाए। यह सुन बृहस्पति समझाते हैं कि सारा जग भगवान राम को जपता है। जो छल करेगा वह श्रीराम की क्रोधाग्नि में भस्म हो जाएगा। भरत जी यमुना तट पर पहुंचते हैं। निषादराज नाव से सभी को पार कराते हैं। राम जी का पता बताने वालो को भरत जी अत्यंत प्रेम करते हैं। रास्ते मे शगुन दिखाई पड़ता तब भरत बोलते हैं कि लगता है अब दर्शन होगा ।
उधर श्रीराम स्नान कर शंकर जी का पूजन करते हैं। तभी देखते हैं कि उत्तर दिशा में धूल उड़ रही है। पशु पंछी भाग रहे हैं। कोल -भील कहते - स्वामी लगता है कि आप के दोनो भाई आ रहे हैं। सीता सुन कर सोच में पड़ जाती हैं कि भरत क्यों आ रहे हैं । भरत जी आश्रम के समीप पहुंच रहे हैं । कामदगिरी के निकट भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के साथ ठहरने की जानकारी मिलने लगी। भरत जी पेड़ों की आड़ में हैं राम जी देख नहीं पाते। भरत करीब पहुंचते ही भगवान राम के चरण पर गिर पड़ते है। श्रीराम उन्हें उठा कर हृदय से लगाते हैं। उनकी आंखों में प्रेम मय आंसुओं की धार बहने लगती है। भगवान का मिलन देख देवता भी जय जयकार करने लगे। भगवान श्रीराम सबको ले कर आश्रम में ले जाते हैं। हर तरफ खुशी छाई रहती है। भरत रात भर जागते हुए यही सोचते रहते हैं कि भगवान राम अयोध्या वापस लौटेंगे कि नहीं। गुरु वशिष्ठ उन्हें इसके लिए कहेंगे या नहीं।