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सरकारी अस्पतालों के लिए मानक बदलने की तैयारी
Updated Sun, 24 Jun 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के पांच साल पुराने मानकों में बदलाव की तैयारी है। मानकों में बदलाव से आधारभूत ढांचे का विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर और इनमें बढ़ोत्तरी की संभावना है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय की इस योजना में जिला-मंडलीय अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी को शामिल किया गया है। इसके लिए 19 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो छह महीने में रिपोर्ट देगी। कमेटी की पहली बैठक 21 जून को दिल्ली में हो चुकी है। कमेटी में स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि के तौर पर यूपी से बनारस के सीएमओ, राजस्थान सरकार के प्रतिनिधि सीएमओ, नीति आयोग, मानवाधिकार आयोग, मिशन डायरेक्टर, विश्व बैंक आदि के अधिकारी शामिल हैं।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन 2013 में जारी मानकों के अनुसार हो रहा है। इसमें कुछ स्वास्थ्य केंद्रों, उप केंद्रों पर एक-एक चिकित्सक और कर्मचारी है। बिस्तरों की संख्या जरूरत के हिसाब से कम है, जबकि जांच की सुविधाएं भी नहीं हैं। कई उपकेंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ और एएनएम नहीं होती हैं। इसी तरह की समस्या जिला, मंडलीय अस्पतालों में भी है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन द्वारा मानकों का अपग्रेडेशन कराया जाना है।
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नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय की इस योजना में जिला-मंडलीय अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी को शामिल किया गया है। इसके लिए 19 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो छह महीने में रिपोर्ट देगी। कमेटी की पहली बैठक 21 जून को दिल्ली में हो चुकी है। कमेटी में स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि के तौर पर यूपी से बनारस के सीएमओ, राजस्थान सरकार के प्रतिनिधि सीएमओ, नीति आयोग, मानवाधिकार आयोग, मिशन डायरेक्टर, विश्व बैंक आदि के अधिकारी शामिल हैं।
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन 2013 में जारी मानकों के अनुसार हो रहा है। इसमें कुछ स्वास्थ्य केंद्रों, उप केंद्रों पर एक-एक चिकित्सक और कर्मचारी है। बिस्तरों की संख्या जरूरत के हिसाब से कम है, जबकि जांच की सुविधाएं भी नहीं हैं। कई उपकेंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ और एएनएम नहीं होती हैं। इसी तरह की समस्या जिला, मंडलीय अस्पतालों में भी है। अब स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन द्वारा मानकों का अपग्रेडेशन कराया जाना है।
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