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माघी पूर्णिमा पर तीन घंटे 24 मिनट तक चंद्रमा को ढंकेगा राहू
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:40 AM IST
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वाराणसी। माघी पूर्णिमा पर साल का पहला ग्रस्तोदित खग्रास चंद्रग्रहण पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में होगा। 31 जनवरी को माघी पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होने के कारण यह एक दुर्लभ संयोग का निर्माण कर रहा है। इस बाबत श्री काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि शास्त्र सम्मत माघ स्नान-दान-यम-नियम-संयम का समापन माघी पूर्णिमा पर होता है। इस बार माघी पूर्णिमा 31 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। यह चंद्रग्रहण पुष्य नक्षत्र में होगा और श्लेषा नक्षत्र में समाप्त होगा।
31 को राहू की अशुभ छाया चंद्रमा को ढंक देगी। भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ यानी स्पर्शकाल सायं 05:18 पर है। ग्रहण का मध्य काल रात्रि 07:00 बजे तथा मोक्ष काल रात्रि 08:42 पर है। काशी में ग्रहण चंद्रोदय सायं 05:35 से दिखायी देगा। इस तरह चंद्रमा पर राहू की छाया तीन घंटे 24 मिनट तक रहेगी। धर्मशास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण में नौ घंटे और सूर्यग्रहण में 12 घंटे से पहले सूतक काल होता है। शास्त्रों में ग्रहण में वृद्ध, बालक और रोगी को छोड़कर अन्य के लिए भोजन आदि निषेध बताया गया है।
पूर्णिमा तिथि 30 जनवरी को रात्रि 09:32 पर लगेगी, जो कि बुधवार को रात्रि 07:15 तक रहेगी। तिथि विशेष पर काशी एवं प्रयाग में गंगा स्नान के साथ सूर्य एवं श्रीहरि की आराधना के उपरांत गरीबों व ब्राह्मणों में दान करना चाहिए। दान में घृत, कंबल, गुड़, काला तिल व स्वेटर सहित गर्म वस्तुएं करनी चाहिए। इस दिन के स्नान-दान से अक्षय पुण्य के साथ ही चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
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31 को राहू की अशुभ छाया चंद्रमा को ढंक देगी। भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ यानी स्पर्शकाल सायं 05:18 पर है। ग्रहण का मध्य काल रात्रि 07:00 बजे तथा मोक्ष काल रात्रि 08:42 पर है। काशी में ग्रहण चंद्रोदय सायं 05:35 से दिखायी देगा। इस तरह चंद्रमा पर राहू की छाया तीन घंटे 24 मिनट तक रहेगी। धर्मशास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण में नौ घंटे और सूर्यग्रहण में 12 घंटे से पहले सूतक काल होता है। शास्त्रों में ग्रहण में वृद्ध, बालक और रोगी को छोड़कर अन्य के लिए भोजन आदि निषेध बताया गया है।
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पूर्णिमा तिथि 30 जनवरी को रात्रि 09:32 पर लगेगी, जो कि बुधवार को रात्रि 07:15 तक रहेगी। तिथि विशेष पर काशी एवं प्रयाग में गंगा स्नान के साथ सूर्य एवं श्रीहरि की आराधना के उपरांत गरीबों व ब्राह्मणों में दान करना चाहिए। दान में घृत, कंबल, गुड़, काला तिल व स्वेटर सहित गर्म वस्तुएं करनी चाहिए। इस दिन के स्नान-दान से अक्षय पुण्य के साथ ही चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
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