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जानलेवा चाइनीज मंझे के खिलाफ नहीं शुरू हुई कार्रवाई
Updated Wed, 27 Dec 2017 02:29 AM IST
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वाराणसी। खिचड़ी का त्योहार नजदीक आते ही जिले में पतंगबाजी का दौर अपने शबाब पर है। मगर, रोजाना आमजन के साथ ही पशु-पक्षियों को गंभीर रूप से घायल कर रहे जानलेवा चाइनीज मंझा के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद मजिस्ट्रेटों और थानेदारों द्वारा कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की इस लापरवाही और चुप्पी के चलते अभी न जाने और कितने लोग चाइनीज मंझा से घायल होंगे इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
दिसंबर महीने की शुरुआत से ही पतंगबाजी के शौकीन अपने शौक को पूरा करने में जुट जाते हैं। मगर, पतंग उड़ाने के लिए देशी मंझे की जगह चाइनीज मंझे के उपयोग से बीते 26 दिनों में 20 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं और पक्षियोें की शामत सी आ गई है। इसे देखते हुए सोमवार को डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने सभी मजिस्ट्रेटों और थानेदारों को चाइनीज मंझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था। अभियान में शिथिलता बरतने वाले थानेदारों और मजिस्ट्रेटों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहीं गई थी। मगर, मंगलवार को जिले में डीएम का निर्देश बेअसर रहा और चाइनीज मंझा बेचने वालों के खिलाफ कहीं कार्रवाई होती नहीं दिखी। वहीं, जानकारों का कहना है कि थाने के बीट आरक्षियों और हल्का प्रभारियोें को पता रहता है कि कहां चाइनीज मंझे की बिक्री होती है लेकिन सुविधा शुल्क के बदले वही शह देते हैं और कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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दिसंबर महीने की शुरुआत से ही पतंगबाजी के शौकीन अपने शौक को पूरा करने में जुट जाते हैं। मगर, पतंग उड़ाने के लिए देशी मंझे की जगह चाइनीज मंझे के उपयोग से बीते 26 दिनों में 20 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं और पक्षियोें की शामत सी आ गई है। इसे देखते हुए सोमवार को डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने सभी मजिस्ट्रेटों और थानेदारों को चाइनीज मंझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था। अभियान में शिथिलता बरतने वाले थानेदारों और मजिस्ट्रेटों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहीं गई थी। मगर, मंगलवार को जिले में डीएम का निर्देश बेअसर रहा और चाइनीज मंझा बेचने वालों के खिलाफ कहीं कार्रवाई होती नहीं दिखी। वहीं, जानकारों का कहना है कि थाने के बीट आरक्षियों और हल्का प्रभारियोें को पता रहता है कि कहां चाइनीज मंझे की बिक्री होती है लेकिन सुविधा शुल्क के बदले वही शह देते हैं और कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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