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डिग्री-सर्टिफिकेट नहीं, गुणवता और ज्ञान पर दें ध्यान : राम नाईक
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:51 AM IST
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वाराणसी। कुलाधिपति एवं राज्यपाल राम नाईक ने मंगलवार को यहां महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 39वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी की सीख दी। कहा कि केवल डिग्री-सर्टिफिकेट नहीं, गुणवत्ता और ज्ञान पर ध्यान जरूरी है। दीक्षांत में उपाधि पाने के बाद किताबी पढ़ाई भले पूरी हो गई हो लेकिन अब जीवन की लड़ाई शुरू हो गई है। मेहनत और अनुशासन के दम पर पूरी मजबूती से इस लड़ाई में आगे बढ़ें। उपाधि और मेडल पाने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होने पर खुशी जाहिर की। कहा कि बेटियों की सफलता से नए युग की शुरुआत हुई है।
परिसर स्थित भव्य पंडाल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि विद्यापीठ 96 साल का हो गया लेकिन यह उसका 39वां दीक्षांत समारोह है। जाहिर है, पूर्व में कई सालों तक दीक्षांत नहीं हुआ। विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह समय पर नहीं होते थे लेकिन अब दीक्षांत समय पर हो रहे हैं। प्रदेश के 25 विश्वविद्यालयों में छह में दीक्षांत हो चुके हैं। बाकी में दिसंबर तक पूरे कर लिए जाएंगे।
कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गाड़ी पटरी पर आई है लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से उन्होंने बात की है। जल्द से जल्द इसे भरा जाएगा। मेडल और उपाधियां पाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी। समय पर दीक्षांत के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिवार और कुलपति की सराहना की। कहा कि उपाधि पाने वाले 99893 विद्यार्थियों में 42575 छात्र और 57380 छात्राएं हैं जबकि मेडल पाने वालों में 14 छात्र, 45 छात्राएं शामिल हैं। यह गौरव की बात है कि बेटियां सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसे महिला सशक्तिकरण का नया युग माना जा सकता है। महिलाओं को सेना में लड़ाकू विमान देना है कि नहीं, आज इसकी चर्चा हो रही है। देश की रक्षामंत्री महिला हैं। महिलाओं का आगे बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत है।
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परिसर स्थित भव्य पंडाल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि विद्यापीठ 96 साल का हो गया लेकिन यह उसका 39वां दीक्षांत समारोह है। जाहिर है, पूर्व में कई सालों तक दीक्षांत नहीं हुआ। विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह समय पर नहीं होते थे लेकिन अब दीक्षांत समय पर हो रहे हैं। प्रदेश के 25 विश्वविद्यालयों में छह में दीक्षांत हो चुके हैं। बाकी में दिसंबर तक पूरे कर लिए जाएंगे।
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कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गाड़ी पटरी पर आई है लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से उन्होंने बात की है। जल्द से जल्द इसे भरा जाएगा। मेडल और उपाधियां पाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी। समय पर दीक्षांत के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय परिवार और कुलपति की सराहना की। कहा कि उपाधि पाने वाले 99893 विद्यार्थियों में 42575 छात्र और 57380 छात्राएं हैं जबकि मेडल पाने वालों में 14 छात्र, 45 छात्राएं शामिल हैं। यह गौरव की बात है कि बेटियां सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसे महिला सशक्तिकरण का नया युग माना जा सकता है। महिलाओं को सेना में लड़ाकू विमान देना है कि नहीं, आज इसकी चर्चा हो रही है। देश की रक्षामंत्री महिला हैं। महिलाओं का आगे बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत है।
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