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कृषि भूमि पर बन गईं कॉलोनियां
Updated Fri, 21 Jul 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। शहर के सुनियोजित विकास के लिए शासन से एप्रूव्ड वीडीए की महायोजना 2031 को जमीन पर उतारने की ईमानदार पहल हुई होती तो आज शहर से लगायत बाहरी हिस्सों तक अवैध कॉलोनियों और जमीनों की सौदेबाजी का जाल नहीं फैलने पाता। नियोजित विकास के लिए शहर के बाहरी हिस्सों में मौके की स्थिति और जरूरत के आधार पर महायोजना में निर्धारित भूमि उपयोग की खुलेआम अनदेखी की गई। जो कृषि भूमि थी उस पर बड़े-बड़े ऑशियाने और कॉलोनियां आबाद हो गईं। हरित पट्टी के लिए निर्धारित क्षेत्र में कार्यालय खोल दिए गए। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ वीडीए के ही तत्कालीन अधिकारियों और अभियंताओं की निगरानी में हुआ। किसी ने जुबां नहीं खोली। अब 27 साल बाद नवागत वीडीए वीसी ने अवैध कॉलोनियां बसाने वाले डेवलपर्स पर कार्रवाई शुरू की तो एक के बाद एक चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं।
एनएच-2 पर जहां कुछ दिनों पहले अवैध प्लाटिंग पर वीडीए ने 14 बड़े डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई की, वहां (मोहनसराय से अलीनगर के बीच) ग्रीन बेल्ट और कृषि योग्य भूमि है। भू उपयोग बदलवाए बिना डेवलपर्स ने जाल बिछा दिया और वीडीए के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। नौकरशाहों के नकारेपन के कारण शुरू हुआ यह खेल सिर्फ मोहनसराय से अलीनगर तक ही नहीं सिमटा है। वाराणसी से आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर हाईवे पर भी ऐसी ही स्थिति है। महायोजना 2031 में निर्धारित भू उपयोग महज फाइलों तक सीमित है। जहां खेती होनी चाहिए वहां कॉलोनियों आबाद हो गईं। जहां पार्क होने चाहिए वहां इमारतें खड़ी हो गई। हरित पट्टी के निर्धारित क्षेत्र में दफ्तर खुल गए। महायोजना 2031 शासन के एप्रूवल के बावजूद जमीन पर नहीं उतर पाई।
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एनएच-2 पर जहां कुछ दिनों पहले अवैध प्लाटिंग पर वीडीए ने 14 बड़े डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई की, वहां (मोहनसराय से अलीनगर के बीच) ग्रीन बेल्ट और कृषि योग्य भूमि है। भू उपयोग बदलवाए बिना डेवलपर्स ने जाल बिछा दिया और वीडीए के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। नौकरशाहों के नकारेपन के कारण शुरू हुआ यह खेल सिर्फ मोहनसराय से अलीनगर तक ही नहीं सिमटा है। वाराणसी से आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर हाईवे पर भी ऐसी ही स्थिति है। महायोजना 2031 में निर्धारित भू उपयोग महज फाइलों तक सीमित है। जहां खेती होनी चाहिए वहां कॉलोनियों आबाद हो गईं। जहां पार्क होने चाहिए वहां इमारतें खड़ी हो गई। हरित पट्टी के निर्धारित क्षेत्र में दफ्तर खुल गए। महायोजना 2031 शासन के एप्रूवल के बावजूद जमीन पर नहीं उतर पाई।
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