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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   500 Saints from India Abroad Gather for Consecration Ceremony of 1,964-Year-Old Dakshinamurti Temple

UP: 1964 वर्ष पुराने दक्षिणामूर्ति मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर जुटेंगे देश-विदेश के 500 संत, होंगे अनुष्ठान

Thu, 16 Apr 2026 06:05 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 16 Apr 2026 06:05 AM IST
सार

Varanasi News: काशी के दक्षिणामूर्ति मठ में 17 अप्रैल से सात दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान शुरू होगा, जिसमें 500 से अधिक संत शामिल होंगे। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के सानिध्य में कार्यक्रम होगा। मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। 23 अप्रैल को पूर्णाहुति होगी, साथ ही साधना व राष्ट्ररक्षा शिविर भी आयोजित होंगे।

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500 Saints from India Abroad Gather for Consecration Ceremony of 1,964-Year-Old Dakshinamurti Temple
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : संवाद

विस्तार

काशी के दक्षिणामूर्ति मठ में विराजमान करीब 1964 साल पुराने भगवान दक्षिणामूर्ति मंदिर में 17 अप्रैल से प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान शुरू होंगे। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के सानिध्य में सात दिवसीय अनुष्ठान में देश-विदेश से 500 से अधिक साधु-संत और अनुयायी शामिल होंगे। राष्ट्ररक्षा और साधना शिविर भी लगेगा। 16 अप्रैल को शंकराचार्य के आने की उम्मीद है।

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काशी में चारों शंकराचार्यों के आश्रम हैं। इसी में एक पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का अस्सी श्रीजगन्नाथ गली में आश्रम है। इस आश्रम में जीर्णशीर्ण हो चुके भगवान दक्षिणामूर्ति मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है। अब यहां प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी चल रही है। शंकराचार्य के शिष्य व मीडिया प्रभारी डॉ. पद्माकर ने बताया कि 17 अप्रैल से प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। 
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काशी के 11 वैदिक विद्वान अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। 17 से 23 अप्रैल तक सुबह और शाम दर्शन और संगोष्ठी होगी। 20 से 22 अप्रैल तक साधना और राष्ट्ररक्षा शिविर लगेगा जो सुबह 10 और शाम को पांच बजे तक चलेगा। इसी बीच 21 अप्रैल को आदिशंकराचार्य का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। 23 अप्रैल को प्राण प्रतिष्ठा की पूर्णाहुति होगी। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य की आदित्य वाहिनी, आनंद सहित तीन वाहिनियों के पदाधिकारी भी देश-विदेश से आएंगे। सभी शंकराचार्य के समक्ष वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

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मंदिर में होगा शिव दरबार, लगेगी हनुमान की प्रतिमा
श्रीदक्षिणामूर्ति मंदिर में शिव दरबार के विग्रह विराजमान होंगे। डॉ. पद्माकर ने बताया कि श्रीदक्षिणामूर्ति मंदिर अति प्राचीन है। मंदिर पर लिखे सन् वैदिक काल के हैं, जिसके अध्ययन के बाद पता चला कि यह मंदिर करीब 1964 साल पुराना है। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर में विराजमान भगवान श्रीदक्षिणामूर्ति को भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। अब मंदिर में शिवलिंग, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी के अलावा भगवान हनुमान की प्रतिमा लगाई जाएगी।

3 दिन प्रवास के बाद चेन्नई हुए रवाना
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती तीन दिनों तक काशी प्रवास के बाद बुधवार की सुबह चेन्नई एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। डॉ. पद्माकर ने बताया कि शंकराचार्य 13 अप्रैल को काशी आए थे। उन्होंने श्रीदक्षिणामूर्ति मठ में प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। इस अनुष्ठान में शामिल होने के लिए 16 अप्रैल को उनके आने की संभावना है।

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