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‘श्रीराम धर्म और सीता नीति समान’
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:47 AM IST
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वाराणसी। देश में अधर्म फैल रहा है। इसके लिए बच्चों को वेद और शास्त्रों का ज्ञान देना होगा। ज्योतिष एवं द्वारिका पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म संसद के आयोजन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का गठन करना नहीं है। श्रीराम धर्म के समान हैं और सीता नीति के समान। रावण ने श्रीराम रूपी धर्म को छोड़ सीता रूपी नीति को पकड़ लिया, परिणाम स्वरूप उसका सर्वनाश हो गया। इसलिए धर्म और नीति दोनों को साथ लेकर चलना होगा। तभी देश का उत्थान संभव है। इस समय धर्म के नाम पर वैमनस्य फैलाया जा रहा है।
साईं कोई भगवान नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि आजकल साईं को लोग भगवान मानने लगे हैं। वह भगवान नहीं है। आरएसएस के लोग मेरे बयान का विरोध करते हैं।
शिव तांडव की प्रस्तुति
उड़ीसा से आये कलाकारों के दल ने ममता के निर्देशन में धर्म संसद में शिव तांडव प्रस्तुत किया। परम धर्म संसद के प्रांगण में ही विश्व कल्याणार्थ पंचदेवपासना यज्ञ लगातार चल रहा है। इसमें पांच देव गणेश, शिव, रुद्र, दुर्गा एवं सूर्य की उपासना के लिए आचार्य विश्वेश्वर दातार धनंजय के आचार्यत्व में 25 भू देवों द्वारा आहुतियां दी जा रही हैं। दूसरे दिन भी विशाल भंडारे का आयोजन अनवरत चलता रहा। करीब दस हजार से ज्यादा सनातन धर्मियों ने सोमवार को यहां प्रसाद ग्रहण किया। प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि सत्तर स्वयंसेवक भंडारे की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
ये संत-विद्वान रहे उपस्थित
धर्म संसद में ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द, स्वामी प्रज्ञानन्द , स्वामी राजीव लोचन दास, स्वामी लक्ष्मण दास, अच्युतानन्द महाराज, इन्दुभवानन्द महाराज, जल कुमार सांई, सुभाष दास, महामंडलेश्वर ऋषिश्वरानन्द, छविराम दास, विश्व चैतन्य, रामसजीवन शुक्ल, सीताराम पांडेय, डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, वासुदेवाचार्य , कृष्णानन्द उपाध्याय, राजेशपति त्रिपाठी, डॉ. गिरीश तिवारी, पं रवि त्रिवेदी के अलावा अमेरिका से टोनी, ब्राजील से चार्ल्स, स्पेन से अविनाश आदि शामिल हुए।
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साईं कोई भगवान नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि आजकल साईं को लोग भगवान मानने लगे हैं। वह भगवान नहीं है। आरएसएस के लोग मेरे बयान का विरोध करते हैं।
शिव तांडव की प्रस्तुति
उड़ीसा से आये कलाकारों के दल ने ममता के निर्देशन में धर्म संसद में शिव तांडव प्रस्तुत किया। परम धर्म संसद के प्रांगण में ही विश्व कल्याणार्थ पंचदेवपासना यज्ञ लगातार चल रहा है। इसमें पांच देव गणेश, शिव, रुद्र, दुर्गा एवं सूर्य की उपासना के लिए आचार्य विश्वेश्वर दातार धनंजय के आचार्यत्व में 25 भू देवों द्वारा आहुतियां दी जा रही हैं। दूसरे दिन भी विशाल भंडारे का आयोजन अनवरत चलता रहा। करीब दस हजार से ज्यादा सनातन धर्मियों ने सोमवार को यहां प्रसाद ग्रहण किया। प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि सत्तर स्वयंसेवक भंडारे की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
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ये संत-विद्वान रहे उपस्थित
धर्म संसद में ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द, स्वामी प्रज्ञानन्द , स्वामी राजीव लोचन दास, स्वामी लक्ष्मण दास, अच्युतानन्द महाराज, इन्दुभवानन्द महाराज, जल कुमार सांई, सुभाष दास, महामंडलेश्वर ऋषिश्वरानन्द, छविराम दास, विश्व चैतन्य, रामसजीवन शुक्ल, सीताराम पांडेय, डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, वासुदेवाचार्य , कृष्णानन्द उपाध्याय, राजेशपति त्रिपाठी, डॉ. गिरीश तिवारी, पं रवि त्रिवेदी के अलावा अमेरिका से टोनी, ब्राजील से चार्ल्स, स्पेन से अविनाश आदि शामिल हुए।
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