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फिर ललचा कर चले गए बादल
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:44 AM IST
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ज्ञानपुर। दो दिनों तक कालीन नगरी के आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादल शनिवार को हवाओं के साथ उड़ गए। इससे मानसूनी बारिश का बना-बनाया माहौल खत्म सा हो गया और सूर्यदेव आग उगलने लगे। दो दिन तक बादलों की उमड़-घुमड़ के बीच चंद मिनटों की मामूली फुहारें ही किसानों को नसीब हो सकीं थीं कि फिर चिलचिलाती धूप और उमस ने सामान्य जनजीवन को बेपटरी कर दिया।
अमूमन 21-22 जून तक आने वाले मानसूनी बादलों की आमद जिले में 28 जून को हुई। इस दौरान जबर्दस्त घेरेबंदी के बीच हल्की बारिश हुई तो लोगों को लगा कि अब इंद्रदेव मेहरबान हो जाएंगे और अरसे से तपती धरती को ठंडक मिल जाएगी। दो दिन तक बादलों की घेरेबंदी चलती रही। लेकिन, शनिवार को अचानक बादल हवा हो गए और धूप खिल गई। जून की तपिश में बेहाल लोगों को मामूली राहत के बाद ही बादलों के फिर ललचाकर चले जाने से किसानों के साथ-साथ आम लोगों के माथे पर भी चिंता उभर आई है। भीषण गर्मी से परेशान लोगों को बारिश का बेसब्री से इंतजार है। शनिवार को सुबह सात बजे ही सूर्यदेव पहले ही तरह रौ में आ गए और आसमान से शोलों की बरसात होने लगी। साथ ही उमस ने पसीने-पसीने कर दिया। दूसरी ओर धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों के चेहरे पर भी मायूसी दिखी। उनका कहना था कि अब बारिश होने में देर नहीं होनी चाहिए। भुड़की के किसान हरिशंकर ने कहा कि नर्सरी तैयार हो चली है। केवल बारिश का इंतजार है। ठीक से बारिश हो जाए तो रोपाई कर दी जाएगी। तमाम किसानों ने तो धान की रोपाई करवा भी दी है।
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अमूमन 21-22 जून तक आने वाले मानसूनी बादलों की आमद जिले में 28 जून को हुई। इस दौरान जबर्दस्त घेरेबंदी के बीच हल्की बारिश हुई तो लोगों को लगा कि अब इंद्रदेव मेहरबान हो जाएंगे और अरसे से तपती धरती को ठंडक मिल जाएगी। दो दिन तक बादलों की घेरेबंदी चलती रही। लेकिन, शनिवार को अचानक बादल हवा हो गए और धूप खिल गई। जून की तपिश में बेहाल लोगों को मामूली राहत के बाद ही बादलों के फिर ललचाकर चले जाने से किसानों के साथ-साथ आम लोगों के माथे पर भी चिंता उभर आई है। भीषण गर्मी से परेशान लोगों को बारिश का बेसब्री से इंतजार है। शनिवार को सुबह सात बजे ही सूर्यदेव पहले ही तरह रौ में आ गए और आसमान से शोलों की बरसात होने लगी। साथ ही उमस ने पसीने-पसीने कर दिया। दूसरी ओर धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों के चेहरे पर भी मायूसी दिखी। उनका कहना था कि अब बारिश होने में देर नहीं होनी चाहिए। भुड़की के किसान हरिशंकर ने कहा कि नर्सरी तैयार हो चली है। केवल बारिश का इंतजार है। ठीक से बारिश हो जाए तो रोपाई कर दी जाएगी। तमाम किसानों ने तो धान की रोपाई करवा भी दी है।
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