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नोटबंदी और जीएसटी से कालीन कारोबार प्रभावित
Updated Tue, 10 Oct 2017 02:03 AM IST
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वाराणसी। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन महावीर प्रताप शर्मा ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से कालीन उद्योग भी प्रभावित हुआ है। इससे कालीन के कारोबार में अब तक 10-20 फीसदी नुकसान हुआ है। हालात सुधरने में छह से नौ महीने का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास हर स्तर पर किए जा रहे हैं ताकि दुनिया में भारतीय कालीन अपनी श्रेष्ठता बरकरार रख सके। वे सोमवार को कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि देशहित में नोटबंदी और जीएसटी दोनों अच्छे फैसले हैं लेकिन अचानक इनके लागू होने से कालीन उद्योग प्रभावित हुआ है। भारतीय कालीन का सबसे बड़ा खरादीर देश अमेरिका है। इसके बाद जर्मनी, यूके, स्पेन और आस्ट्रेलिया में भी भारतीय कालीन का अच्छा बाजार है। उन्होंने कहा कि कालीन के क्षेत्र में पाकिस्तान कहीं नहीं टिकता। भारत अफगानिस्तान के साथ मिलकर कालीन उद्योग को नई दिशा देने के लिए प्रयासरत है। इस दिशा में दोनों देशों की सरकारें काम कर रही हैं।
महावीर प्रताप शर्मा ने कहा कि चीन भारतीय कालीन का बड़ा बाजार बनता जा रहा है। भारतीय कालीन को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन ब्रांडिंग भी की जाएगी। फेसबुक और ट्विटर पर भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी कालीन निर्माता भदोही और मिर्जापुर के हैं। इन हस्तशिल्पियों के हुनर को बचाने की जरूरत है। उनके लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाओं समेत पीएफ आदि की भी व्यवस्था की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि देशहित में नोटबंदी और जीएसटी दोनों अच्छे फैसले हैं लेकिन अचानक इनके लागू होने से कालीन उद्योग प्रभावित हुआ है। भारतीय कालीन का सबसे बड़ा खरादीर देश अमेरिका है। इसके बाद जर्मनी, यूके, स्पेन और आस्ट्रेलिया में भी भारतीय कालीन का अच्छा बाजार है। उन्होंने कहा कि कालीन के क्षेत्र में पाकिस्तान कहीं नहीं टिकता। भारत अफगानिस्तान के साथ मिलकर कालीन उद्योग को नई दिशा देने के लिए प्रयासरत है। इस दिशा में दोनों देशों की सरकारें काम कर रही हैं।
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महावीर प्रताप शर्मा ने कहा कि चीन भारतीय कालीन का बड़ा बाजार बनता जा रहा है। भारतीय कालीन को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन ब्रांडिंग भी की जाएगी। फेसबुक और ट्विटर पर भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी कालीन निर्माता भदोही और मिर्जापुर के हैं। इन हस्तशिल्पियों के हुनर को बचाने की जरूरत है। उनके लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाओं समेत पीएफ आदि की भी व्यवस्था की जाएगी।
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